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भारतीयों के लिए छत्तीसगढ़ एक ऐसा राज्य है, जिसे पग पग पर धर्म और आस्था स्थलियों का आर्शीवाद प्राप्त है। और इन्हीं तमाम धार्मिक स्थलों में से एक है गिरौदपुरी धाम जो प्रसिद्ध है जैतखाम जैसी शानदार संरचना के लिए। इंजीनियरिंग का करिश्मा कही जाने वाली यह 77 मीटर ऊंची संरचना देखने में वाकई अद्भुत लगती है। सतनामी संप्रदाय के शाश्वत प्रतीक के रूप में पूरी दुनिया को लुभाता विश्व का सबसे ऊंचा यह जैतखाम इतना आकर्षित करता है कि दूर-दूर से लोग इसे देखने के लिए आते हैं। 

 गिरौदपुरी धाम, छत्तीसगढ़ की सबसे महत्वपूर्ण आस्था स्थली कही जाती है और यह जैतखाम पर्यटकों तथा श्रद्धालुओं को सूर्य और प्रकृति के समागम के दर्शन कराता प्रतीत होता है। महानदी और जोंक नदी के संगम पर स्थित गिरौदपुरी धाम, बिलासपुर से करीब 80 किमी की दूरी पर स्थित है। एक बेहद पवित्र धार्मिक स्थल होने के साथ-साथ यह जगह छत्तीसगढ़ में सतनामी पंथ के संस्थापक श्री गुरु घासीदास जी की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध है। 

गिरौदपुरी धाम का इतिहास   

इस जगह का आध्यात्म और इतिहास से बहुत गहरा नाता रहा है। और सबसे विशेष बात यह है कि सतनामी पंथ के संस्थापक श्री गुरु घासीदास जी के जन्मस्थली होने के नाते देश-विदेश से पर्यटक यहां आध्यात्मिक ज्ञान की खोज में यहां आते हैं। 

श्री गुरु घासीदास जी के बारे में प्रचलित है कि वह एक बहुत ही साधारण किसान परिवार में जन्में थे और जैतखाम के ठीक बगल में आज भी उनके बैठने का स्थान स्थापित है। ऐसा भी कहा जाता है कि आत्मज्ञान की प्राप्ति के लिए उन्होंने औराधरा वृक्ष के नीचे तपस्या की थी, जो अब तपोभूमि के नाम से प्रचलित है। 

गिरौदपुरी धाम क्यों जाएं

घूमने के साथ-साथ आध्यात्म में रुचि रखने वाले लोगों को गिरौदपुरी धाम अवश्य आना चाहिये। क्योंकि इस पूरी जगह का आभामंडल ऐसा है, जो आपको स्वंय के बारे में बहुत से नये तथ्यों से परिचित कराता है।  

गिरौदपुरी धाम के मुख्य आकर्षण

गिरौदपुरी मेला. रंगारंग स्थानीय संस्कृति और परंपराओं से सुसज्जित यह मेला भारी संख्या में पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां का एक प्रमुख आकर्षण यहां की जाने वाली पूजा विधि है, जिसमें सैंकड़ों लोग सफेद कपड़े घारण कर पूजा अनुष्ठान में भाग लेते हैं। 

अमृत कुंड. गिरौदपुरी से महज 1 किमी की दूरी पर स्थित इस जगह का इतिहास बहुत रोचक है। कहा जाता है कि यहां पर पीने के पानी की बहुत किल्लत रहती थी और प्रशासन के तमाम प्रयासों के बावजूद यह समस्या दूर नहीं हो पा रही थी। तब एक स्थानीय साधु ने लोगों की मदद करने के उद्देश्य से अपनी दैवीय शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए एक पहाड़ के हिस्से को अपने अंगूठे से छूकर एक गढ्ढे में तब्दील कर दिया, जहां से मीठे पानी की जलधारा फूट पड़ी। फिर जिस कुंड में इस पानी का भंडारण किया जाने लगा उसे अमृत कुंड का नाम दिया गया।     

गिरौदपुरी धाम क्या करें

गायत्री मंदिर. अगर आप भी गिरौदपुर के आस-पास के कुछ रोचक और दिलचस्प स्थानों की खोज में निकले हैं तो आपको गायत्री मंदिर के दर्शन जरूर करने जाना चाहिये। एक सैलानी के रूप में आपको यहां आकर एक अलग ही प्रकार का अनुभव प्राप्त होगा। 

दुर्ग भी जाएं ज़रूर. शिवनाथ नदी के पूर्व में स्थित यह एक अद्भुत शहर है, जहां पर्यटकों को जरूर जाना चाहिये। यह जगह दुर्ग-भिलाई के शहरी समुदाय का हिस्सा है, जो इतिहास और आधुनिकता का एक ही समय में खूबसूरत ताना-बाना पेश करता दिखता है। और यही वजह है कि इस जगह को मिनी इंडिया के नाम से भी पुकारा जाता है। 

खान-पान और पहनावा

मेहमाननवाजी के मामले में छत्तीसगढ़ के लोगों का जवाब नहीं है, जो अपने सहज और दोस्ताना व्यवहार के लिए भी जाने जाते हैं। यहां के लोग खान-पान और कपड़ों के तो शौकीन होते ही हैं, साथ उन्हें साहित्य से भी बड़ा लगाव होता है। यहां महिलाएं ज्यादातर पारंपरिक कछोरा साड़ी में दिखाई देती हैं, जो सूती, रेशम और लिनन जैसे कपड़ों से बनी होती है और यहां के पुरुष गले में एक विशेष प्रकार की माला पहनते हैं, जिसे कौंधी कहा जाता है तथा त्यौंहारों के मौके पर कड़ा पहनते हैं। यदि यहां के स्थानीय व्यंजनों की बात करें तो आमट, चीला, भजिया और फरा यहां के कुछ लोकप्रिय व्यंजन हैं।  

गिरौदपुरी धाम कैसे पहुंचे

हवाई मार्ग. रायपुर हवाई अड्डा, यहा का सबसे निकटतम हवाई अड्डा है जो शहर से करीब 12 किमी की दूरी पर स्थित है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, और पुणे जैसे शहरों से यहां नियमित रूप से उड़ानें आती हैं। इसलिए यह एयरपोर्ट काफी व्यस्त रहता है। हवाई अड्डे से अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए आप स्थानीय टैक्सी या बस द्वारा आसानी से पहुंच सकते हैं। 

रेल मार्ग. भाटापार, बिलासुर और महासमुन्द यहां के निकटतम रेलवे स्टेशन, जहां के लिए दिल्ली, पुणे और बेंग्लुरु से ट्रेनों की अच्छी सुविधा है। स्टेशन पर उतरने के बाद आपको अपने गंतव्य के लिए स्थानीय टैक्सी, बस या ऑटो रिक्शा वगैराह आसानी से मिल जाएंगे।

सड़क मार्ग. छत्तीसगढ़ राज्य दिल्ली, पुणे, बेंग्लुरु और मुंबई जैसे शहरों से सड़क मार्ग द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा है। अपनी लोकेशन के अनुसार आप यहां 26 से 27 घंटे में यहां आसानी से पहुंच सकते हैं। 

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