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तिब्बती लूनर कैलेंडर के अनुसार साल के 10 वें महीने के 18 वें दिन लॉसोंग उत्सव मनाया जाता है। यह उत्सव मुख्य रूप से 4 दिनों तक जारी रहता है। यह ऐसा समय है जब किसान अपनी फसलों की कटाई का जश्न मनाते हैं। भूटिया जनजाति का एक पारंपरिक त्योहार लॉसोंग उत्सव भी लेपोचा जनजाति के लोगों द्वारा मनाए जाने वाले नमोसों त्योहार की तरह ही समान उत्साह के साथ मनाया जाता है।

यह त्यौहार केवल भारत में ही नहीं बल्कि पड़ोसी देश नेपाल और भूटान में भी मनाया जाता है। क्या आप जानते हैं कि इस उत्सव के दौरान किए जाने वाले नृत्य महान संत पद्मसंभव के जीवन से बयान किए गए किस्से दिखाते हैं? इसे उत्तर-पूर्वी भारत में मनाए जाने वाले सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक माना जाता है और पर्यटकों के लिए तो यह उत्सव निश्चित रूप से सिक्किमी संस्कृति के बारे में जानकारी जुटाने का एक शानदार समय है।

लॉसोंग उत्सव का मुख्य आकर्षण 

उत्सव और स्थानीय कार्यक्रम 

पुजारियों द्वारा देवताओं को ’ची-फुत’ अर्पित करने के बाद लोसॉन्ग उत्सव की शुरुआत होती है। ची-फुत एक विशेष प्रकार की शराब है और स्थानीय स्तर पर काफी प्रसिद्ध है। इस धार्मिक अनुष्ठान के बाद, एक प्रतीकात्मक दानव राजा का एक पुतला जलाया जाता है जो बुराई के विनाश का प्रमुख रूप से प्रतिनिधित्व करता है।

ब्लैक हैट डांस और चैम डांस प्रमुख आंखों को लुभाने वाले प्रदर्शन हैं जो लॉसोंग फेस्टिवल के दौरान होते हैं। ये मुख्य रूप से सकारात्मकता और खुशी के साथ वर्ष का स्वागत करने के लिए किए जाते हैं। पुरुष और भिक्षु इन पारंपरिक नृत्यों के साथ-साथ स्थानीय गायन कार्यक्रमों में भी भाग लेते हैं। मजे की बात यह है कि इस उत्सव में भाग लेने वाले पुरुष भारी पारंपरिक परिधानों के साथ बड़े मुखौटे पहनते हैं, जो कि देखने में बहुत ही आकर्षक और साथ ही मजेदार लगता है।

कैसे पहुंचे 

हवाई मार्ग. यहां पहुंचने के लिए निकटतम हवाई अड्डा रमटेक मठ से लगभग 124 किमी की दूरी पर बागडोगरा में स्थित है। जिसके लिए नई दिल्ली, हैदराबाद, अहमदाबाद, गुवाहाटी जैसी जगहों से सीधी उड़ानें हैं। इसके अलावा, बागडोगरा और गंगटोक के बीच एक हेलीकाप्टर सेवा भी है। हालांकि, उड़ान की समाप्ति के बाद आप गंतव्य तक पहुंचने के लिए कैब ले सकते हैं।

सड़क मार्ग. सिक्किम सड़क नेटवर्क के माध्यम से दिल्ली, मुंबई, दार्जिलिंग और कलिम्पोंग जैसे शहरों से बहुत अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। यहां पहुँचने के लिए आपको दिल्ली से 1,602 किमी, मुंबई से 2,426 किमी, दार्जीलिंग से 127 किमी और कलिम्पोंग से लगभग 104 किमी की दूरी तय करनी होगी।

रेल मार्ग. इसके लिए सिलीगुड़ी और न्यू जलपाईगुड़ी गंगटोक से दो निकटतम रेलवे स्टेशन हैं। दिल्ली, पुणे और कोलकाता जैसे अन्य शहरों से उनकी अच्छी कनेक्टिविटी है। आप यहां से जाने के बाद आवश्यक दूरी तय करने के लिए कैब या बस ले सकते हैं। ट्रेन से यात्रा करने के लिए डिब्रूगढ़ टाउन राजधानी एक्सप्रेस, सीमांचल एक्सप्रेस और हावड़ा एसएफ एक्सप्रेस कुछ अच्छे विकल्प हैं।

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  • 1 दिन

  • सांस्कृतिक

  • सिक्किम
  • त्यौहार की तारीख

    27 December 2021 - 30 December 2021

  • स्थान

    रमटेक मठ, सिक्किम

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