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भूमचू त्योहार मूल रूप से बौद्ध त्योहार है, जो तिब्बती चंद्र कैलेंडर के पहले महीने के 14 और 15 वें दिन में मनाया जाता है। ग्रेगोरियन  कैलेंडर के हिसाब से, यह फरवरी या मार्च में आता है। 'भूम' का शाब्दिक अर्थ पॉट और 'चुम' का अर्थ पानी है। भूम को बहुत पवित्र फूलदान माना जाता है और यह फूलदान काफी संख्या में पवित्र मिट्टी, बहुमूल्य रत्नों और पानी से बना होता है। यह घटक भारत के विभिन्न शुभ स्थानों, ज़ाहौर और ओडियाना से एकत्र किए जाते हैं। 

यह दिलचस्प त्यौहार आगामी साल के लिए राज्य के भाग्य को जानने के लिए मनाया जाता है। यह माना जाता है कि, भुमचू का पवित्र जल इसमें उठाए गए पानी के स्तर के माध्यम से राज्य के अगले साल के भाग्य को बता सकता है। सिक्किम में यह 2-दिवसीय त्योहार बौद्ध धर्म और इसके अनुष्ठानों और मान्यताओं के बारे में एक गहरी अंतर्दृष्टि प्रदान करता है। यह सिक्किम के ताशीदिंग मठ में मनाया जाता है। इस त्योहार को स्थानीय लोग बहुत ही आनंद और उत्साह के साथ मनाते हैं।

भूमचू महोत्सव का इतिहास

ऐसा माना जाता है कि, 755 और 804 ईस्वी के बीच के समय में तिब्बत में भुमचू त्योहार मनाना शुरू किया गया था। उस युग के दौरान, राजा ट्रिसॉन्ग ड्यूटेसिन इस क्षेत्र पर शासन करते थे। यह राजा  तीन धर्म को मानते थे, उन्होने ही इस क्षेत्र में बौद्ध धर्म को फैलाने में मुख्य भूमिका निभाई थी। राजा ट्रिसॉन्ग ड्यूटेसिन को तीन में से एक माना जाता है। उनके शासनकाल के दौरान बौद्ध धर्म के प्रतिष्ठित आर्चाय गुरु पद्मसंभव को राज्य में आमंत्रित किया गया था। उन्होंने अपने कलश से पवित्र जल के साथ भूमि का संरक्षण भी किया। यह फूलदान के रूप में एक खजाने के रूप में छिपा हुआ था और 17 वीं शताब्दी तक नहीं मिला। ऐसा कहा जाता है कि इसे केवल पद्मसंभव के पुनर्जन्म द्वारा फिर से खोजा गया था। तब से, भूमचू त्योहार बड़े धूम-धाम से मनाया जाने लगा।

भूमचू महोत्सव के मुख्य आकर्षण 

फूलदान उदघाटन समारोह - इस महोत्सव  के पहले दिन, ताशीदिंग मठ में रखी गई पवित्र कलश को खोला जाता है। इसमें जल स्तर को देखकर, लामा (तिब्बत बौद्ध भिक्षु) सिक्किम के लिए आने वाले वर्ष के लिए भविष्यवाणी करते हैं। यदि जल स्तर पूरा भरा होता है, तो राज्य में क्रांति और उथल-पुथल का संकेत देता है। यदि जल स्तर कम है, तो यह सूखे और अकाल को दर्शाता है। अगर यदि पानी सिर्फ आधा भरा है, तो यह आगे आने वाले समृद्ध और शांतिपूर्ण वर्ष के आने का प्रतीक है।

पानी का वितरण - इस महोत्सव में मटके का पानी को काफी शुभ माना जाता है। यह स्थानीय लोगों के लिए समृद्धि और सौभाग्य लाने का प्रतीक है हालांकि, बहुत कम मात्रा में पानी वितरित किया जाता है। इसके लिए भक्त आधी रात से ही कतारों में लगना शुरू कर देते हैं।

समापन समारोह - उत्सव के दूसरे दिन समापन समारोह आयोजित किया जाता है। बर्तन को पास की पवित्र नदियों के पानी से भर दिया जाता है और फिर बंद कर दिया जाता है, और प्रार्थनाएं की जाती है, जिसके बाद बर्तन को अगले साल तक बंद रखा जाता है और फिर अगले साल भूमचू महोत्सव के दौरान इसे खोला जाता है।

कैसे पहुंचे?

अगर आप भी त्यौहार का हिस्सा बनना चाहते हैं तो निम्नलिखित माध्यमों से आप गंगटोक पहुँच सकते हैं। इस त्यौहार के अलावा, गंगटोक घूमने के लिहाज़ से भी बहुत ही खूबसूरत और शानदार जगह है। यह शहर दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और बेंगलुरु से क्रमशः 1,575, 680, 2,398, 2,625 किमी की दूरी पर स्थित है। आप परिवहन के निम्नलिखित साधनों से गंगटोक पहुँच सकते हैं।

हवाई मार्ग - गंगटोक के लिए निकटतम हवाई अड्डा बागडोगरा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (IXB) है। सिलीगुड़ी के पश्चिमी भाग में स्थित यह हवाई अड्डा भारतीय वायु सेना के AFS बागडोगरा में एक सिविल एन्क्लेव के रूप में संचालित है। इसे दार्जिलिंग, गंगटोक, कर्सियांग, कलिम्पोंग, और मिरिक के हिल स्टेशनों के प्रवेश द्वार के रूप में भी माना जाता है। इसे 2002 में सीमित अंतरराष्ट्रीय परिचालनों के साथ एक कस्टम हवाई अड्डे का दर्जा दिया गया था। हवाई अड्डे पर उतरने के बाद, आपको कैब या बस जैसे सार्वजनिक परिवहन के कुछ साधनों द्वारा बाकी की दूरी को कवर करनी होगी।

नीचे कुछ विकल्प दिए गए हैं -

  1. दिल्ली - इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से इंडिगो, एयर इंडिया, विस्तारा। हवाई किराए की कीमत Rs.2,500 से 3,000 के बीच शुरू होती है। 
  2. जयपुर - जयपुर एयरपोर्ट से नई दिल्ली होते हुए इंडिगो और स्पाइसजेट की उड़ानें भी उपलब्ध है। हवाई किराए की कीमत 3,500 रुपये से शुरू होती है। 
  3. भुवनेश्वर - भुबनेश्वर एयरपोर्ट से कोलकाता होते हुए एयर एशिया, इंडिगो और स्पाइसजेट की उड़ानें हैं। हवाई किराए की कीमत 3,500 रुपये से शुरू होती है। 
  4. लखनऊ - लखनऊ एयरपोर्ट से गो एयर और इंडिगो से उड़ान भर सकते हैं। हवाई किराए की कीमत 3,500 रुपये से शुरू होती है। 
  5. अहमदाबाद - अहमदाबाद हवाई अड्डे से इंडिगो, स्पाइसजेट, गो एयर की फ्लाइट लेकर आप जा सकते हैं। हवाई किराए की दर 5000 रुपये से शुरू होती है। 

रेल मार्ग - यहां पहुंचने के लिए सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन न्यू जलपाईगुड़ी है जो सिलीगुड़ी में स्थित है और गंगटोक से इसकी सीधी कनेक्टिविटी है। इस रेलवे स्टेशन की स्थापना साल 1960 में नॉर्थ-ईस्ट फ्रंटियर रेलवे ज़ोन के कटिहार रेलवे डिवीजन के तहत की गई थी। यह पूर्वोत्तर भारत का सबसे बड़ा और सबसे व्यस्त रेलवे जंक्शन माना जाता है। स्टेशन पर उतरने के बाद, आपको कैब या बस जैसे सार्वजनिक परिवहन के कुछ साधनों द्वारा बाकी दूरी को कवर करने की आवश्यकता होगी।

  1. दिल्ली - नई दिल्ली स्टेशन से ब्रह्मपुत्र मेल लेकर आप न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन पर उतर सकते हैं। ​
  2. गुवाहाटी - गुवाहाटी स्टेशन से एएनवीटी सुंदरी एक्सप्रेस है।
  3. पटना - दानापुर स्टेशन से DBRT राजधानी एक्सप्रेस है। 
  4. वाराणसी - वाराणसी जंक्शन से DADN GHY एक्सप्रेस उपलब्ध हैं। 

सड़क मार्ग - आप अपने लोकेशन के आधार पर आप इसके सुव्यवस्थित सड़क नेटवर्क द्वारा गंगटोक की यात्रा कर सकते हैं। आप या तो अपने स्वयं के वाहन, कैब या बस से भी यात्रा कर सकते हैं। पटना से, बस का किराया 400 रुपये से शुरू होता है जबकि जमशेदपुर से बस का किराया Rs.800 से शुरू होता है

निम्लिखित सड़क माध्यम से आप गंगटोक की यात्रा कर सकते हैं - 

  1. पटना - एनएच 27 या एनएच 31 के माध्यम से 572 किमी
  2. दिल्ली - NH27 के माध्यम से 1,574 किमी
  3. लखनऊ - एनएच 27 के माध्यम से 1,022 किमी
  4. औरंगाबाद - एनएच 30 या एनएच 27 के माध्यम से 2,224 किमी

एडोट्रिप के सर्किट प्लानर की मदद से अब यात्रा योजना बनाना हुआ और भी आसान। अब आप इस ख़ास शहर के लिए अपने मुताबिक यात्रा की योजना बनाएं । यहां आपको मिलेगा यात्रा से जुड़े हर एक सुझाव। क्लिक करें।  


  • 2 दिन

  • धार्मिक

  • सिक्किम
  • त्यौहार की तारीख

    18 March 2022

  • स्थान

    ताशीदिंग मठ

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