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अमरनाथ यात्रा हर हिंदु भक्तों के दिल में एक विशेष स्थान रखती है। हर साल जून से अगस्त महीनों के बीच यह स्थान पर लाखों तीर्थ यात्री भगवांन शिव के दर्शनार्थ आते हैं। यह यात्रा श्रावणी मेले के दौरान होती है, जो हिंदु कैलेंडर के अनुसार श्रावण मास में आती है। यह गुफा श्रीनगर से 3,888 मीटर की ऊंचाई पर लगभग 141 किमी की दूरी पर स्थित है। इस पवित्र गुफा की प्रमुख विशेषता बर्फ से प्राकृतिक शिवलिंग का निर्माण है जिसके चलते इसे हिमानी शिवलिंग भी कहते है। कहा जाता है कि यहां पूजा करने वाले लोगों को बाबा अमरनाथ का आशीर्वाद मिलता है।

यह यात्रा 46 किमी की है जो तीर्थयात्रियों को अपनी आस्था की शक्ति की आत्म-परीक्षण करने के लिए यात्रा पर ले जाती है। इस जगह से जुड़ी आस्था का अंदाजा हर साल इस स्थान पर उमड़ने वाले भक्तों की संख्या से लगाया जा सकता है। भक्तों का मानना है कि इस स्थान पर जाने से सभी सांसारिक पापों से मुक्ति मिल जाती है। लोक कथाओं के अनुसार, यह वही स्थान है जहां पर भगवान शिव ने देवी पार्वती को जीवन और अनंत काल का रहस्य बताया था।

अमरनाथ गुफा के बारे में बात की जाए तो यह गुफा करीब 5,000 पुरानी है जिसे हिंदु धर्मों में पवित्र स्थानों में से एक माना जाता है। यह देवत्व में अटूट विश्वास और अमरता की खोज के बारे में है। अमरनाथ गुफा के पीछे आस्था, विश्वास और धर्म की एक मर्मस्पर्शी कहानी है। 

सदियों पहले की बात है, जब कश्मीर घाटी पानी के नीचे डूबी हुई थी। कहा जाता है कि, इस गुफा की खोज ऋषि भृगु ने की थी, उन्होनें ही सबसे पहले पानी के नीचे जाने पर इस गुफा के बारे में पता लगाया था जिसमें बर्फ से लदे पहाड़ों के बीच सुरम्य गुफा का पता चलता है। यह स्थान भारत के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है, अमरनाथ भक्तों के लिए यह जगह किसी स्वर्ग से कम नहीं है। इस गुफा के अंदर शिवलिंग बर्फ की संरचना में है जिसे बाबा बरफानी कहां जाता है। 

अमरनाथ यात्रा का इतिहास

गुफा के बारे में दिलचस्प धार्मिक कथाओं में से एक भगवान शिव और उनकी पत्नी देवी पार्वती से संबंधित है। एक बार देवी पार्वती ने भगवान शिव से जीवन से जुड़ी मोक्ष और अमरता के बारे में सवाल पूछा तब इस रहस्य के बारे में जानकारी देने के लिए भगवान शिव एक एकांत स्थान की तलाश में अमरनाथ गुफा में गए जो कि एक आदर्श स्थान था। 

धार्मिक कथाओं के अनुसार, गुफा के रास्ते में शिव ने गोपनीयता बनाए रखने के लिए अपने सभी आभूषण से छुटकारा पा लिया था। गुफा के रास्ते पर पहलगाम में नंदी को छोड़ा, उसके बाद चंदनबाड़ी में चांद को छोड़ा और शेषनाग नामक स्थान पर उन्होनें सांपों को छोड़ा। भगवान गणेश को महागुन पर्वत पर छोड़ दिया था। यह पंजतरणी में था, जहां उन्होनें पांच तत्वों- पृथ्वी, वायु, अग्नि, जल और आकाश को छोड़ा था। ये सभी स्थान लोकप्रिय तीर्थ स्थल है।

अमरनाथ यात्रा 2021, के प्रमुख आकर्षण

राजसी आध्यात्मिक यात्रा - गुफा की ओर जाने वाला मार्ग 5 दिवसीय यात्रा का एक हिस्सा है। पहला पड़ाव पहलगाम में है जहां से यात्रा शुरू होती है। गुफा में प्रवेश के लिए काफी सारे ठहराव हैं, और प्रत्येक का अपना एक धार्मिक महत्व है। चंदनबाड़ी आधार शिविर यात्रा का एक प्रारंभिक बिंदु है और रास्ते में रात के दौरान कई पड़ाव है। पिस्सु टॉप, सेषनाग झील और पंचतरणी पुराने मार्ग पर प्रमुख है। दूसरा मार्ग सोनर्मग से शुरू होता है और आपको बालटाल, डोमेल और बरारी होते हुए आपको अमरनाथ ले जाता है। कहां जाता है कि भगवान शिव ने अपनी यात्रा पुराने मार्ग से शुरू की थी।

दर्शनीय दृश्य - एक लंबा ट्रेक होने के चलते भक्तों को शानदार दृश्यों का आनंद लेने का अवसर मिलता है। पूरा रास्ता मनोरम दृस्यों से भरा हुआ है। पहाड़ों पर जमी बर्फ और अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है।

फूड हॉल - जैसे ही आप अमरनाथ की यात्रा पर जाते है, वहां आपके लिए स्वादिष्ट भोजन की प्रतिक्षा की जाती है। कई सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली सुविधाएं, साथ ही गैर- लाभकारी संगठन, मार्ग में भोजन के स्टाल स्थापित करते है। रास्ते में तीर्थयात्रियों के लिए विश्राम शिविर का भी व्यवस्था है।

हेलिकाप्टर यात्रा - इस स्थान के दर्शन के लिए हेलिकाप्टर की सेवा भी मौजूद है। हेलिकाप्टर की सवारी एक ही समय में आरामदायक और रोमांचक दोनों है। हेलिकाप्टर सेवाएं पहलगाम और बालटाल से उपलब्ध है।   

कैसे पहुंचे?

हवाई मार्ग - पहलगाम में एयरपोर्ट नहीं है। इस शहर तक पहुंचने के लिए निकटतम हवाई अड्डा श्रीनगर एयरपोर्ट है जो लगभग 90 किमी की दूरी पर स्थित है। यहां पहुंचने के बाद टैक्सी या बस ले सकते है। श्रीनगर एयरपोर्ट से भारत के अन्य राज्यों से सीधी कनेक्टिंग उड़ानें उपलब्ध है।

दिल्ली- दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से इंडिगो, जेट एयरवेज़ और एयर इंडिया लेकर आप श्रीनगर एयरपोर्ट जा सकते है। हवाई किराये की कीमत 1,800 रूपये से शुरू होती है।

मुंबई- छत्रपति शिवाजी टर्मिनल से स्पाइस जेट, गो एयर की उड़ानें उपलब्ध है।  हवाई किराये की कीमत 3,500 रूपये से शुरू होती है।

अहमदाबाद- अहमदाबाद एयरपोर्ट से एयर इंडिया, स्पाइस जेट की उड़ानें उपलब्ध है। हवाई किराये की कीमत 3,000 रूपये से शुरू होती है।

रेल मार्ग - हाल ही में श्रीनगर में रेलवे स्टेशन बन गया है। श्रीनगर रेल नेटवर्क अनंत मार्ग और काजीकुंड तक जुड़ा है, काजीकुंड से बनिहाल तक बनी यह सुरंग भारत की सबसे बड़ी सुरंग है जो कि पीर पंजाल टनल के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा दूसरा निकटतम रेलवे स्टेशन जम्मू तवी है जो कि 261 किमी की दूरी पर स्थित है। स्टेशन से आप कैब या बस लेकर आप अपने गंत्व्य तक पहुंच सकते है। 

दिल्ली- नई दिल्ली स्टेशन से स्वराज एक्सप्रेस (12471), सर्वोदय एक्सप्रेस (12473) लेकर आप जम्मू तवी स्टेशन पर उतर सकते है।

मुंबई- मुंबई स्टेशन से बिबेक एक्सप्रेस (19027), स्वराज एक्सप्रेस (12471) है।

कोलकाता- कोलकाता के हावड़ा स्टेशन से हिमगिरी एक्सप्रेस (12331) है।

सड़क मार्ग - श्रीनगर सड़क मार्ग द्वारा पूरे देश से जुड़ा हुआ है। भारत के कई राज्यों से विशेषकर उत्तरी राज्यों से पहलगाम के लिए नियमित बस सेवा उपलब्ध है। यह सड़क माध्यम से भारत के बाकी शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। 

दिल्ली- NH-44 के माध्यम से 800 किमी

मुंबई- NH- 48 के माध्यम से 2,169 किमी

चंडीगढ़- NH- 44 के माध्यम से 546 किमी

शिमला- NH- 44 के माध्यम से 627 किमी

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  • 42 दिन

  • धार्मिक

  • जम्मू और कश्मीर
  • त्यौहार की तारीख

    28 July 2021 - 22 August 2021

  • स्थान

    पहलगाम

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