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सूरजकुंड मेला भारत का एक रंगीन पांरपरिक शिल्प त्योहार है जो कि सूरजकुंड परिसर में हरियाणा सरकार द्वारा आयोजित किया जाता है। हरियाणा के फरीदाबाद में आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम ना केवल भारत बल्कि अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों के बीच भी काफी प्रसिद्ध है। इस मेले की विशेषता यह है कि इसमें भारत के सभी राज्यों के हस्तशिल्प व कारीगरों द्वारा बनायें समान को एक स्थान पर देखा व खरीदा जा सकता है। यह परंपरा, विरासत और संस्कृति के अद्भुत समन्वय के साथ-साथ माटी की महक सूरजकुंड हस्तशिल्प मेले की पहचान है।

सूरजकुंड का मेला हर साल एक नये विषय पर आयोजित किया जाता है व इसके आधार पर ही मेले की साज-सज्जा की जाती है। इस मेले में लोक संगीत का भी आयोजन किया जाता है। सभी राज्य के कलाकार अपने-अपने लोक संगीत का प्रदर्शन करते है। ऐसा कहा जा सकता है कि, भारतीय कला, संस्कृति और संगीत को एक ही स्थान पर देखने के लिए सूरजकुंड का मेला बेहतर जगह है। इस मेले का हिस्सा बनने के लिए भारत से ही नहीं विदेशो से भी कलाकार आते है। इस मेले में हर साल देश-विदेश से लाखों दर्शक मेले का आनन्द लेने के लिए आते हैं।

सूरजकुंड शिल्प मेले का इतिहास 

सूरजकुंड शिल्प मेले का आयोजन पहली बार साल 1987 में भारत के हस्तशिल्प, हथकरघा और सांस्कृतिक विरासत की समृद्धि एवं विविधता को प्रदर्शित करने के लिए किया गया था। सूरजकुंड का नाम यहां 10वीं सदी में तोमर वंश के राजा सूरज पाल द्वारा बनवाए गए एक प्राचीन रंगभूमि सूर्यकुंड से पड़ा। यह एक अनूठा स्मारक है, क्योंकि इसका निर्माण सूर्य देवता की आराधना करने के लिए किया गया था और यह यूनानी रंगभूमि से भी मेल खाता है। यह मेला वास्तव में, इस शानदार स्मारक की पृष्ठभूमि में आयोजित भारत की सांस्कृतिक धरोहर की भव्यता और विविधता का जीता-जागता प्रमाण है।

सुरजकुण्ड मेला का मुख्य उद्देश्य 

इस मेले के आयोजन का मुख्स उद्देश्य भारत की परंपरागत व रीति-रिवाजों को कायम रखाना है और इस परंपरा को मेले में आये दर्शकों को इससे अवगत कराना है। इस मेले में भारत के सभी राज्यों के आये कलाकार व कारीगर अपनी अपनी कला व शिल्पकला का प्रदर्शन करते है।

सुरजकुण्ड मेला सैंकड़ों शिल्पियों के लिये रोजी-रोटी कमाने का एक अच्छा स्थान बन गया है जहां उनके लिए कला और शिल्प के राष्ट्रीय मंच के प्रदर्शन से अन्य रास्ते भी खुलते हैं। इसलिये वे अपनी कलाओं और शिल्पों के बेहतरीन नमूने लाते हैं और उन्हें मेले में प्रदर्शित करते हैं। मेले से नियार्तकों और खरीददारों को वार्षिक मिलन का भी अवसर मिलता है। यहां किसी बिचौलिए के बिना शिल्पकार और निर्यातक आमने-सामने होते हैं। इससे शिल्पकारों को अपनी कला क्षेत्र का विस्तार करने और उसमें सुधार करने का सीधा मौका मिलता है।

सूरजकुंड मेला के मुख्य आकर्षण 

थीम 

सूरजकुंड मेले का मुख्य आकर्षण यह है कि हर साल इस आयोजन के दौरान किसी एक राज्य को थीम स्टेट ऑफ़ द ईयर का सम्मान मिलता है। इस बार आपको हरियाणा के सूरजकुंड में हिमाचली संस्‍कृति की झलक दिखेगी। फरवरी 2022 में होने वाले 37वें अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेले में पर्यटक हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत वादियों व लोक संस्कृति का दीदार करेंगे। मेला का थीम स्टेट इस बार हिमाचल प्रदेश होगा। जबकि, कंट्री पार्टनर के रूप में उज्बेकिस्तान को चयनित किया गया है। 

हस्तशिल्प सामान

सुरजकुण्ड मेला सैंकड़ों शिल्पियों के लिये रोजी-रोटी कमाने का एक अच्छा स्थान बन गया है जहां उनके लिए कला और शिल्प के राष्ट्रीय मंच के प्रदर्शन से अन्य रास्ते भी खुलते हैं। इस मेले में भारत के सभी राज्यों के हस्तशिल्प व कारीगरों द्वारा बनाये समान को एक स्थान पर देखा व खरीदा जा सकता है। 

फूड कोर्ट 

इस मेले में बहु व्यंजन फूड कोर्ट बनाये जाते हैं, जो कि दर्शकों में बहुत लोकप्रिय है। दर्शक भी मेले में बने फूड कोर्ट में भारतीय स्ट्रीट फूड एवं अन्य राज्यों के मुंह में पानी ला देने वाले व्यंजनों का आनंद लेने में पीछे नहीं रहते हैं। 

लोक-कला प्रदर्शन

इस मेले में लोक संगीत का भी आयोजन किया जाता है। सभी राज्य के कलाकार अपने-अपने लोक संगीत का प्रदर्शन करते है। ऐसा कहा जा सकता है कि भारतीय कला, संस्कृति और संगीत को अगर एक ही स्थान पर कहीं देखा जाये तो वह जगह सुरजकुण्ड का मेला है। 

नाट्यशाला में होने वाले नाटक और संगीत 

इन सब के अलावा, आप नाट्यशाला में होने वाले सबसे प्रतिष्ठित संगीत प्रदर्शन का भी आनंद ले सकते हैं। सूरजकुंड शिल्प मेला को यहां होने वाले नाटक और स्किट्स और भी दिलचस्प बनाता है। 

2013 में सूरजकुंड क्राफ्ट्स मेला को मिला अंतर्राष्ट्रीय दर्जा

केंद्रीय पर्यटन, कपड़ा, संस्कृति, विदेश मंत्रालयों और हरियाणा सरकार के सहयोग से सूरजकुंड मेला प्राधिकरण तथा हरियाणा पर्यटन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित यह उत्सव सौंदर्यबोध की दृष्टि से सृजित परिवेश में भारत के शिल्प, संस्कृति एवं व्यंजनों को प्रदर्शित करने के लिहाज से अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन कैलेंडर में एक महत्वपूर्ण स्थान एवं शोहरत रखता है।

वर्ष 2013 में सूरजकुंड शिल्प मेले को अंतर्राष्ट्रीय मेले का दर्जा दिए जाने से इसके इतिहास में एक नया कीर्तिमान स्थापित हुआ। 

सूरजकुंड क्राफ्ट्स मेला 2022 टिकट प्राइस और तारीखें 

साल 2022 में होने वाला यह छतीसवा सूरजकुंड इंटरनेशनल क्राफ्ट्स मेला है। इस कार्यक्रम का आयोजन  फरवरी तक किया जाएगा। सप्ताहांत के लिए टिकट की कीमत 180 रुपया है जबकि सप्ताह के बाकी दिनों के लिए 120 रुपया होगी। 

सूरजकुंड मेला कैसे पहुंचे 

हवाई यात्रा मार्ग. निकटतम हवाई अड्डा इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है। यह पुणे, मुंबई और बैंगलोर जैसे अन्य भारतीय शहरों के साथ बहुत अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। हवाई अड्डे पर उतरने के बाद, आपको फरीदाबाद पहुँचने के लिए लगभग 45-50 किमी की दूरी तय करनी होगी।

सड़क यात्रा मार्ग. फरीदाबाद की सड़क मार्ग से अन्य भारतीय शहरों के साथ अच्छी कनेक्टिविटी है। दिल्ली, पुणे, मुंबई और बैंगलोर जैसे शहरों से आपको क्रमशः 51 किमी, 1,383 किमी, 1,416 किमी और 2,096 किमी की दूरी तय करनी होगी।

रेल यात्रा मार्ग. ट्रेन के माध्यम से फरीदाबाद की यात्रा के लिए आपको बल्लभगढ़, फरीदाबाद न्यू टाउन के लिए ट्रेन लेनी होगी। वहां से आप अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए कैब, ऑटो या बस आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।

एडोट्रिप के सर्किट प्लानर की मदद से अब यात्रा योजना बनाना हुआ और भी आसान। अब आप इस ख़ास शहर के लिए अपने मुताबिक यात्रा की योजना बनाएं । यहां आपको मिलेगा यात्रा से जुड़े हर एक सुझाव। क्लिक करें।  


  • 16 दिन

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  • हरियाणा
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  • स्थान

    सूरजकुंड

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