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यह बात सभी को पता है कि भगवान बुद्ध स्वयं भगवान के अवतार थे, इसलिए दुनिया भर के लोगों को उनके उपदेशों और सत्यता में जबरदस्त विश्वास है। गौतम बुद्ध को समर्पित लहाब डुचेन उत्सव, सिक्किम में मनाया जाता है, जो स्वर्ग से धरती पर दूसरी बार गौतम बुद्ध के आगमन का प्रतीक है। साथ ही, सिक्किम वह स्थान है जहाँ कई बौद्ध मठ हैं और लोगों में उनके प्रति असीम आस्था और सम्मान है। देश भर और सम्पूर्ण विश्व से बौद्ध धर्म के अनुयायी अपनी प्रार्थना की पेशकश करने और बौद्ध मठों का पता लगाने के लिए यहाँ आते है।

लहाब डुचेन फेस्टिवल का इतिहास

किसी भी अन्य धर्म की तरह बौद्ध धर्म में भी कई लोककथाएँ और कहानियाँ हैं जिन पर विश्वास करना कठिन है, लेकिन वे कई लोकप्रिय अनुष्ठानों का एकमात्र आधार और उत्तर है ,जो कई अनुत्तरित प्रश्नों और रहस्यों को जोड़ता है। प्रसिद्ध लोककथाओं के अनुसार, गौतम बुद्ध स्वर्ग में चढ़े, जहां 33 देवता रहते थे। वे अपने उपदेशों को देवताओं के साथ साझा करना चाहते थे। उन्होने ४१ साल की उम्र में ट्रिपस्त्रिम्स के रूप में यह काम किया, ऐसी मान्यता है। ऐसा कहा जाता है कि गौतम बुद्ध की माता रानी माया भी वहाँ निवास करती थी क्योंकि वे जीवन और मृत्यु के चक्र में फंस गई थी, जब गौतम बुद्ध को जन्म देने के बाद वे मर गई थीं।

कुछ महीने वहाँ बिताने के बाद और अपनी माता और देवताओं के साथ अपनी शिक्षाओं को साझा करने के बाद, गौतम बुद्ध पृथ्वी पर वापस आना भूल गए। जब वह पृथ्वी पर वापस नहीं आए , तो उनके एक शिष्य मौदगल्यायन ने उन्हे वापस लाने का फैसला किया। गौतम बुद्ध,अपने शिष्य के साथ एक लंबी बहस के बाद, पूर्णिमा की रात को, वापस आने के लिए सहमत हुए। किंवदंतियों में कहा जाता है कि भगवान विश्वकर्मा ने देवताओं के मुख्य वास्तुकार बुद्ध को पृथ्वी पर लौटने के लिए एक सीढ़ी बनाई। यह त्योहार दूसरी बार स्वर्ग से पृथ्वी पर बुद्ध के आगमन का प्रतीक है।आज यह त्यौहार कई एशियाई देशों जैसे श्रीलंका, थाईलैंड, लाओस और म्यांमार में मनाया जाता है।

सिक्किम में घूमने की जगहें

रूमटेक मठ. रुमटेक सिक्किम के सबसे बड़े मठों में से एक है जो एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। मठ और रहस्यमय शांत वातावरण के चारों ओर लुभावने दृश्य निश्चित रूप से जीवन की हलचल से आपके लिए एक तरोताज़ा करने वाला पलायन होगा।

कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान. बौद्ध अनुयायियों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान होने के अलावा, सिक्किम प्रकृति और वन्यजीव प्रेमियों में भी यह बहुत लोकप्रिय है। सिक्किम समृद्ध जैव विविधता और वनस्पतियों और जीवों की कई प्रजातियों का घर है। कंचनजंगा की तीसरी सबसे ऊँची चोटी के नाम पर, राष्ट्रीय उद्यान यूनेस्को का विश्व धरोहर स्थल है।

पेम्यांग्त्से मठ. पेमयांगत्से मठ को सिक्किम में सबसे पुराना माना जाता है। मठ पद्मसंभव को समर्पित है, जो भारतीय उपमहाद्वीप के जाने-माने बौद्ध गुरु हैं।

लहाब डुचेन फेस्टिवल के प्रमुख आकर्षण

सभी बौद्ध 9 वें महीने की 22 तारीख़ को तिब्बत कैलेंडर के अनुसार, जो कि ज्यादातर अक्टूबर में पड़ता है, मठों में एक साथ त्यौहार मनाने के लिए आते हैं ।

हर साल यह त्यौहार बौद्ध अनुयायियों द्वारा बहुत उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है। अनुष्ठान और उत्सव के गवाह बनने के लिए देश भर से बहुत सारे पर्यटक विशेष रूप से सिक्किम आते हैं। लहाब डुचेन त्योहार प्रभुत्व को मनाने और प्रभु को श्रद्धांजलि देने का एक अनूठा तरीका है।

लहाब डुचेन फेस्टिवल कैसे पहुंचा जाये 

गैंगटोक सिक्किम की राजधानी है और देश के सभी हिस्सों से रेल, सड़क और हवाई मार्ग से यहाँ आसानी से पहुँचा जा सकता है।

सड़क मार्ग. जो पर्यटक सिक्किम की यात्रा की योजना बना रहे हैं, वे यहाँ तक पहुंचने के लिए अंतर-राज्यीय पर्यटक बसों का विकल्प चुन सकते हैं या अपने निजी वाहन से भी पहुंचा जा सकता हैं। दोनों तरीकों से दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु से क्रमशः 1,600, 2,400, 750 किमी और 2,500 किमी की यात्रा करनी पड़ती है।

रेल मार्ग. न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन पर उतर कर सुंदर भारतीय राज्य सिक्किम के लिए रवाना हो सकते हैं। इस स्टेशन पर भारत के प्रमुख शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, कोलकाता के बेंगलुरु से ट्रेनें आती-जाती रहती हैं।

हवाई मार्ग. बागडोगरा यहाँ का निकटतम हवाई अड्डा है जो 150 किमी की दूरी पर स्थित है। हवाई अड्डे से भारत के सभी हिस्सों से उड़ानें प्राप्त होती हैं। हवाई अड्डे से, सिक्किम के किसी भी वांछित स्थान तक पहुंचने के लिए स्थानीय परिवहन सेवाओं का लाभ ले सकते है। हवाई अड्डा देश के सभी हिस्सों से सीधी और कनेक्टिंग उड़ानें प्राप्त करता है, इसलिए यात्रा से कुछ दिन पहले टिकट बुक कर सकते हैं।

एडोट्रिप के सर्किट प्लानर की मदद से अब यात्रा योजना बनाना हुआ और भी आसान। अब आप इस ख़ास शहर के लिए अपने मुताबिक यात्रा की योजना बनाएं । यहां आपको मिलेगा यात्रा से जुड़े हर एक सुझाव। क्लिक करें।  


  • 1 दिन

  • धार्मिक

  • सिक्किम
  • कार्यक्रम की तारीख

    27 October 2021

  • स्थान

    सिक्किम

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