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राजस्थान उन राज्यों में से एक है जो अपनी मज़बूत संस्कृति और बहादुर योद्धाओं के लिए जाना जाता है और उसी का जश्न मनाने के लिए, राज्य में कुंभलगढ़ महोत्सव का आयोजन हर साल होता है। हालांकि, यह महोत्सव काफी मज़ेदार होता है। साथ ही यह क्षेत्रीय कला और संस्कृति को बचाने का भी एक प्रयास है।

मेवाड़ के महाराणा कुंभा द्वारा बनाये गए कुंभलगढ़ किले में 1-3 दिसंबर तक यह तीन दिवसीय वार्षिक उत्सव मनाया जाता है। यह महोत्सव राजस्थान के अलग-अलग पहलुओं को दिखाता है। जिसमें मुख्य रूप से कला और संस्कृति, लाइट और साउंड शो, प्रदर्शनियां आदि शामिल हैं।

इन सब के अलावा, रात के शो के दौरान कुछ बॉलीवुड के दिग्गज कलाकार भी प्रदर्शन करते हैं। इस महोत्सव का सबसे दिलचस्प हिस्सा, खूबसूरती से सजाया गया कुम्भलगढ़ किला रहता है जो उत्सव जैसी अनुभूति देता है।

कुंभलगढ़ महोत्सव क्यूं मनाया जाता है

कुंभलगढ़ महोत्सव महान राजा महाराणा कुंभा के सम्मान में मनाया जाता है, जो मेवाड़ के शासक थे। महाराणा कुंभा राजपूतों के सिसोदिया वंश के थे। वह मेवाड़ के राणा मोकल सिंह और सोभाया देवी के पुत्र थे। उन्हें भारत के पश्चिमी क्षेत्रों में कला और संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए सबसे बड़े प्रभावकों में से एक माना जाता है। शासक खुद एक महान संगीतकार थे और संगीत के अलग-अलग पहलुओं को जानने के इच्छुक थे। वह एक प्रशिक्षित वीणा वादक थे और उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में संगीत मीमांसा, संगीत रत्नाकर और सुधा प्रभा शामिल हैं।

कुंभलगढ महोत्सव के मुख्य आकर्षण 

लोक नृत्य प्रदर्शन

सूफी. यह एक भँवर नृत्य है जिसे ध्यान के रूप में भी माना जाता है। कई प्रसिद्ध नृत्य मंडली कार्यक्रम में प्रदर्शन करती हैं। उस दौरान, वहां एक सुखदायक वातावरण बना रहता है। इन प्रभावशाली प्रदर्शन को देखने के दौरान व्यक्ति शांति महसूस कर सकता है।

कालबेलिया. यह राजस्थान के लोक नृत्य में से एक है जो कि सदियों से किया जाता है और इसने अंतर्राष्ट्रीय पहचान भी हासिल की है। इस दौरान, अनुभवी कलाकारों द्वारा प्रस्तुत लोक नृत्य के मनमोहक प्रदर्शनों का आनंद लिया जा सकता है।

भवाई नृत्य. यह राजस्थानी लोक नृत्य का एक और रूप है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय है। यह नृत्य कला पुरुषों और महिलाओं द्वारा अपने सिर पर मिट्टी के बर्तनों को संतुलित करके किया जाता है और एक बहुत ही मज़ेदार रहता है। 

चारी नृत्य. यह एक और राजस्थानी नृत्य है जो महिला कलाकारों के समूह द्वारा किया जाता है। इस दौरान, सुंदर और रंगीन राजस्थानी पारंपरिक पोशाक में महिला चारी नर्तकियों का एक समूह नृत्य करता है। इस नृत्य में एक जल रहे बर्तन को पकड़ना और उसे बिना छुए घूमना भी शामिल है। यह नृत्य सभी के लिए एक साहसिक अनुभव है।

मोर. राजस्थान का एक और नृत्य जो पुरुष कलाकारों के समूह द्वारा किया जाता है। इस नृत्य में, उनके शरीर को एक मोर की तरह दर्शाया जाता है। इसके लिए वह कुछ सहारा भी लेते हैं। इस महोत्सव को देखने के लिए यह एक और ख़ास वजह हो सकती है।

शास्त्रीय नृत्य प्रदर्शन

कथक. यह नृत्य प्रख्यात कथक नर्तक दर्शकों का मनोरंजन करने और उन्हें भारत की विरासत से परिचित कराने में अपना भरपूर योगदान देते हैं।

भरतनाट्यम. यह एक और शास्त्रीय नृत्य का रूप है जो मुख्यतः तमिलनाडु से उत्पन्न हुआ था। यह नृत्य दक्षिण भारतीय संस्कृति और धर्म को दर्शाता है।

कुचिपुड़ी. इस नृत्य का वर्णन नाट्य शास्त्र के हिंदू संस्कृत पाठ में मिलता है। यह उन नृत्य रूपों में से एक है जिसे ज्यादातर कहानी कहने की विधि के रूप में व्याख्यायित किया जाता है जहां दर्शकों के साथ संवाद करने के लिए कुरकुरा और तेज हाथ इशारों का प्रयोग किया जाता है।

मणिपुरी. इसे जागोई के नाम से भी जाना जाता है जिसका नाम पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर के नाम पर पड़ा क्योंकि यह वहीं से उत्पन्न हुआ था।

राजस्थान के भारतीय लोक कला मंडल द्वारा किया जाने वाला कठपुतली शो 

प्रसिद्ध कठपुतली शो का आयोजन मशहूर लोक कला मंडल द्वारा किया जाता है। यह स्ट्रिंग्स को संतुलित करके किया जाता है जो कठपुतली के ऊपर से होते हुए प्रदर्शन करने वालों के ऊपर से गुजरता है। यह एक शानदार प्रदर्शन में से एक है जिसका आप आनंद ले सकता है।

लोक संगीत कार्यक्रम 

इस कार्यक्रम में कई राजस्थानी लोक संगीत का प्रदर्शन किया जाता है, जिसमें पनिहारी और मॉनसून सहित कई अन्य गीत शामिल हैं। जब शास्त्रीय संगीत की बात आती है, तो हम कर्नाटक संगीत, हिंदुस्तानी संगीत और कई रागों को सुन सकते हैं।

बॉलीवुड संगीत 

इस दौरान प्रसिद्ध गायक और अभिनेता भी दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए कुम्भलगढ़ किले के मंच से शानदार संगीत की प्रस्तुति करते हैं। 

प्रदर्शनी 

इस महोत्सव में आए कोई भी व्यक्ति इस प्रदर्शनियों का आनंद ले सकता है जो कि दिन के समय में आयोजित किए जाते हैं। इस प्रदर्शनी में हस्तशिल्प, जातीय पोशाक, हस्तनिर्मित आभूषण और कुछ स्मृति चिन्ह शामिल हैं।

कुंभलगढ़ महोत्सव कैसे पहुंचे

हवाई यात्रा. कुंभलगढ़ में अपना हवाई अड्डा नहीं है। इसके लिए निकटतम हवाई अड्डा उदयपुर हवाई अड्डा है जो कुम्भलगढ़ से 115 किलोमीटर दूर है। यह हवाई अड्डा डबोक में स्थित है, जो रेस्तरां, होटल आदि से युक्त है। साथ ही यहां एयर इंडिया, अलायंस एयर और विस्तारा एयरलाइन सेवाओं जैसे कुछ प्रसिद्ध नाम हैं, जो दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई से नियमित उड़ानों के साथ उदयपुर हवाई अड्डे पर उतरते हैं। हवाई अड्डा पहुंचने के बाद आप कुंभलगढ़ तक पहुँचने के लिए बस, ऑटो या टैक्सी जैसे परिवहन के स्थानीय साधन आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।

रेल मार्ग. रेल के द्वारा निकटतम हवाई अड्डा फालना रेलवे स्टेशन है जो कुंभलगढ़ किले से 84 किलोमीटर दूर है। यह रेलवे स्टेशन दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई सहित भारत के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

सड़क मार्ग. कुंभलगढ़ का सड़क संपर्क आस-पास के शहरों के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों से भी बहुत अच्छा है। इन शहरों में राजसमंद (48 किमी), नाथद्वारा (51 किमी), और सदरी (60 किमी) शामिल हैं। यदि आप दिल्ली से कुंभलगढ़ तक की सड़क यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो यह निश्चित रूप से एक शानदार विचार है क्योंकि आप इस दौरान एक एक पल का आनंद लेने सकते हैं। कुम्भलगढ़ किला दिल्ली से 530 किलोमीटर दूर है और उनके बीच सड़क की दूरी राष्ट्रीय राजमार्ग 48 और 58 के माध्यम से कुल 613.9 किलोमीटर है।

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  • 3 दिन

  • पारंपरिक

  • राजस्थान
  • कार्यक्रम की तारीख

    01 December 2021 - 03 December 2021

  • स्थान

    कुम्भलगढ़ किला, राजस्थान

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