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अगर मिज़ाज से आप एक रोमांच पसंद सैलानी हैं, तो निश्चित रूप से आपको ऐसे ठिकानों की तलाश रहती होगी जहां आप बिंदास होकर कुछ साहसिक कर पाएं। इस लिहाज से आंध्र प्रदेश के कर्नूल जिले में स्थित श्रीशैलम जाना तो बनता ही है। भव्य कृष्णा नदी के तट पर स्थित यह शहर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों के लिए विशेष रूप से जाना जाता है।

आध्यात्म में रुचि रखने वाले लोगों को तो विशेष रूप से यह जगह पसंद आती है। क्योंकि इस पूरे इलाके का वातावरण ही बेहद अलौकिक है, जो असीम शांति के साथ साथ-साथ आस्था के समंदर में गोते लगाने का सा अनुभव कराता है। यहां भगवान शिव के दो प्राचीन मंदिर शिखरेश्वर और मल्लिकार्जुन स्वामी मन्दिर भी हैं, जहां भारी संख्या में भक्तगण मत्था टेकने आते हैं।

श्रीशैलम का इतिहास

इस स्थान का हमारी सभ्यता, संस्कृति और धार्मिक आस्था में बहुत महत्वपूर्ण स्थान रहा है। यहां यह जानना बेहद दिलचस्प होगा कि इस जगह का इतिहास करीब 30 से 40 हजार वर्ष प्राचीन है। इतना ही नहीं यहां मिले पुरालेख भी इस बात का प्रमाण देते हैं कि भारत के इस दक्षिणी हिस्से में सबसे पहले सातवाहन राजवंश का शासन हुआ करता था। 

श्रीशैलम से जुड़े दिलचस्प किस्से

पर्वत की कथा

एक प्राचीन कथा के अनुसार एक बार महिर्षि सिलादा के पुत्र पर्वत ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए बहुत कठोर तप किया और वरदान मांगा कि शिवजी उसके शरीर में ही वास करने लगें तथा सारे देवता और पवित्र तीर्थों का जल उसके मस्तक पर विराजमान हो जाएं, साथ ही उसने इस बात की भी इच्छा जताई कि उसके पास आने वाले हर व्यक्ति को मोक्ष प्राप्त हो जाये। हालांकि यह वरदान कुछ अजीब था, लेकिन फिर भी शिव जी प्रसन्न होकर उसे यह आशीर्वाद दे दिया। भगवान ने उसे एक विशाल पर्वत में बदल दिया और स्वयं उस पर श्री पर्वत स्वामी के नाम से निवास करने लगे। तभी से इस जगह को श्रीशैलम के नाम से बुलाया जाने लगा।

वासुमती की कहानी

एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार एक ऋषि की पुत्री वासुमती ने ब्रह्मदेव को प्रसन्न करने के लिए इसी पर्वत पर बहुत कठिन तप किया था। फिर जब प्रसन्न होकर ब्रह्मदेव ने उससे वरदान मांगने को कहा तो उसने अपने श्री नाम मांग लिया, जो इस पर्वत के नाम से भी जुड़ा हुआ था। तब से इस जगह को श्रीशैलम के नाम से जाना जाने लगा।

कुछ अन्य रोचक तथ्य

श्रीशैलम बांध, कृष्णा नदी पर बना यह दक्षिण भारत के सबसे बड़े बांधों में से है। 

भारत का सबसे बड़ा बाघ-सरंक्षण अभ्यारण्य यहीं पर स्थित है, जिसे श्रीशैलम नागार्जुन सेंचुरी के नाम से जाना जाता है। इस अभ्यारण्य में बाघों के साथ-साथ आप कई दुर्लभ प्रजातियों के जीव-जंतुओं और वनस्पतियों की अनेकों किस्में देख सकते हैं।

अक्का महादेवी गुफाएं, शिखरेश्वर मंदिर और पातालगंगा यहां के कुछ प्रमुख आकर्षण हैं।

श्रीशैलम क्यों जाएं

कर्नूल स्थित यह महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल भगवान शिव को समर्पित है, जिसके साथ अनेकों पौराणिक कथाएं जुड़ी हैं। यहां स्थित मंदिर भारत के प्राचीनतम मंदिरों में से हैं। एक पवित्र आस्था केंद्र होने के साथ-साथ यह जगह अपने अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य के लिए भी जानी जाती है। इस लिहाज से रोमांच और कुदरत में दिलचस्पी रखने वाले पर्यटकों के लिए यह स्थान स्वर्ग से कम नहीं है।

श्रीशैलम घूमने के मुख्य स्थळ 

पाताल गंगा. कृष्णा नदी के बैकवाटर्स में स्थित यह पवित्र स्थल बेहद खूबसूरत है। भक्तगण यहां पवित्र गंगा नदी के जल में डुबकी लगाते हैं और पुण्य पाते हैं। यहां गंगा की धारा बेहद शांत तरीके सी कल-कल की आवाज करती बहती है। गंगा का शांत स्वर सुनने में बेहद मधुर संगीत का सा आभास देता है।

श्रीशैलम टाइगर रिजर्व. भारत के सबसे विशाल टाइगर रिजर्व पार्क के रूप में प्रसिद्ध यह पूरा अभयारण्य करीब 3568 एकड़ के क्षेत्र में फैला है और सैलानियों के आकर्षण का केन्द्र है। यहां बहुत सारे बाघों के साथ-साथ तरह-तरह की वनस्पतियों के अलावा तेंदुए, स्लोथ बियर, ढोल, भारतीय पैंगोलिन, चीतल, सांभर हिरण सहित कई अन्य प्रकार के जीव-जंतु भी विचरण करते देखे जा सकते हैं। और अगर आप वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी में दिलचस्पी रखते हैं, तो आपको यहां जरूर आना चाहिये। 

श्रीशैलम क्या करें

मल्लिकार्जुन स्वामी मंदिर के दर्शन को जाएं. श्रीशैलम के प्रमुख आकर्षणों में से एक यह मंदिर कृष्णा नदी के तट पर स्थित है, जिसका निर्माण विजयनगर के राजा हरिहर राय की देखरेख में हुआ था। यहां मंदिर की दीवारों पर उकेरी गयी शानदार वास्तुकला और मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है, जो सैलानियों का खासा खींचती है। 

श्रीशैलम बांध का भव्य नज़ारा. आपको यह जानकर वाकई आश्चर्य होगा कि भारत की 12 सबसे बड़ी पनबिजली परियोजनाओं में एक श्रीशैलम बांध भी है, जो देख हर भारतीय को गर्व का अहसास होता है। इसलिए निश्चित रूप से यह यहां के प्रमुख आकर्षणों में गिना जाता है। यहां चारों ओर फैली प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगल, गहरी घाटियां, हरियाली, झरने और बांध से गिरने वाले पानी का शोर, पर्यटकों का हाथ सा थाम लेता है।     

उत्सव, महोत्सव एवं सांस्कृतिक गतिविधियां

लांगेस्ट विंटर फ़ेस्टिवल. रामोजी फिल्म सिटी में होने वाला यह सालाना महोत्सव पूरी तरह से मनोरंजन और रोमांच को समर्पित होता है, जिसमें शामिल होने वालों के लिए अनेकों हैरतअंगेज आकर्षण होते हैं, साथ ही होता है एक सिने मैजिक टूअर, जिसमें बेहद प्रसिद्ध और रोमांचकारी फिल्मों की लोकेशन पर कुछ हैरान कर देने वाले लाइव शोज आयोजित किये जाते हैं। भारतीय सिनेमा में रुचि रखने वालों के लिए यह फ़ेस्टिवल कभी ना भूलने वाला अनुभव होता है। 

लुम्बिनी फेस्टिवल. हर साल दिसंबर माह के दूसरे सप्ताह में मनाए जाने वाले इस तीन दिवसीय लुम्बिनी फ़ेस्टिवल का आयोजन हैदराबाद के नागार्जुन सागर में किया जाता है। भगवान बुद्ध को समर्पित इस महोत्सव के दौरान यहां कला और शिल्प से जुड़े अनेकों आयोजन किये जाते हैं, जिनमें भाग लेने के लिए पूरी दुनिया से लोग आते हैं। इसमें भाग लेने वाले कलाकार अपने-अपने हुनर के ज़रिये महात्मा बुद्ध के जीवन और उनकी शिक्षाओं का प्रदर्शन करते हैं। 

श्रीशैलम आने का सबसे अच्छा समय 

अक्तूबर से फरवरी के महीनों में यहां का मौसम बहुत बढ़िया रहता है। अगर आप यहां के शांत माहौल और सुंदरता का वास्तव में आनंद लेना चाहते हैं इन महीनों में यहां ज़रूर आएं। क्योंकि घूमने के लिहाज से यही दिन सबसे अच्छे दिन माने जाते हैं। 

श्रीशैलम कैसे पहुंचे 

हवाई मार्ग. श्रीशैलम के लिए उड़ानों की व्यवस्था बहुत अच्छी नहीं है। वैसे हैदराबाद स्थित राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, यहां का सबसे निकटतम हवाई अड्डा है। दिल्ली, मुंबई और पुणे सहित देश के कई अन्य प्रमुख हवाई अड्डों से यह एयरपोर्ट अच्छी तरह जुड़ा है। 

रेल मार्ग. श्रीशैलम के लिए कोई सीधी रेल सेवा उपलब्ध नहीं है। इसलिए अगर आप श्रीशैलम आने की योजना बना रहे हैं तो ध्यान रहे कि यहां से सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन कम्बम जिले में स्थित है। यहां से आप ट्रेन द्वारा श्रीशैलम पहुंच सकते हैं। 

सड़क मार्ग. इसके अच्छी बात तो हो ही नहीं कि आप अपने वाहन से यहां आने का प्रोग्राम बनाएं। आखिरकार सड़के के रास्ते ड्राइव करते हुए ऐसे किसी शानदार स्थल के लिए यात्रा के लिए निकलना वास्तव में आपको तरो ताज़ा कर देता है और एक यादगार अनुभव भी होता है। आप चाहें तो एनएच- 44, एनएच- 65 और एनएच- 16 से होते हुए दिल्ली, मुंबई, पुणे और कोलकाता आदि शहरों से यहां आसानी से पहुंच सकते हैं। 

एडोट्रिप के सर्किट प्लानर की मदद से अब यात्रा योजना बनाना हुआ और भी आसान। अब आप इस ख़ास शहर के लिए अपने मुताबिक यात्रा की योजना बनाएं । यहां आपको मिलेगा यात्रा से जुड़े हर एक सुझाव। क्लिक करें।  


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