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“ओल्ड इज़ गोल्ड” यदि आप इस कहावत का अर्थ सही मायने में समझना चाहते हैं, तो आपको यात्रा का एक लंबा प्रोग्राम बना कर आंध्र प्रदेश के गोदावरी जिले में आना चाहिये। क्योंकि यहां बसा है पेरुरु नामक एक हेरिटेज गांव, जो आज के इस डिजिटल युग में भी अपनी प्राचीन जीवनशैली और परंपराओं को सहेजे हुए है और इसीलिए यह गांव देशभर अपनी एक अलग पहचान बनाये हुए है। यहां आकर लगता है मानो भारतीय परंपराएं असल मायने में हमारे गांव-देहातों में ही तो बसती हैं। 

पेरुरु गांव की कई बातें हैरान कर देती हैं। जैसे कि भारत का यह एकलौता ऐसा गांव है जो प्राचीन विरासतों और रिवायतों का पालन करने के बावजूद मौजूदा समय से कहीं भी कमतर नहीं है। इसीलिए यहां के लोगों का बेहद सरल और साधारण जीवन है, जो देसी-विदेशी पर्यटकों को यहां खींच ले आता है। 

गांव का इतिहास

कहा जाता है कि प्राचीन काल में दो शाही परिवारों में विवाह संबंध स्थापित होने के बाद बड़ी संख्या में ब्राह्मण परिवार और पुजारी इस गांव में आकर बस गये थे। उन शाही परिवारों में से एक वर्तमान के आंध्र प्रदेश से संबंध रखता था, जबकि दूसरा तमिलनाडू से था। इन परिवारों के बच्चों की आपस में शादी के बाद बड़ी संख्या में ब्राह्मण गोदावरी नदी के तट पर बस गये, जिसका व्यापक प्रभाव नज़़दीकी गांवों की संस्कृति पर पड़ा। पेरुरु भी उन्हीं गांवों में से एक है। इन तमिल ब्राह्मणों को आज द्रविड़ ब्राह्मण या द्रविदुलू के नाम से जाना जाता है।

महानगरों से यहां आने वाले सैलानियों को इस गांव के कच्चे रास्ते, प्राचीन मंदिर और स्थानीय लोगों का बेहद साधारण जीवन अचरज में डाल देता है कि बिना किसी आधुनिक गैजेट के ये लोग भला इतने आराम से कैसे रह लेते हैं? पर सच यह है कि साधारण और बेहद शांत होने के बावजूद यहां के बहुत सुकून से रहते हैं और बड़ा प्यारा सा जीवन जीते दिखते हैं और निश्चित रूप से यही बात आपको इस गांव का दीवाना बना देती है। 

यहां की सबसे ख़ास बात यह है कि इस गांव की सड़कें और घर आज भी ठीक उसी तरह बने हुए हैं जैसे वह सैकड़ों सालों पहले लगते थे। मतलब यह है कि इस गांव के निवासियों को शहरी चकाचौंध, गगनचुंबी इमारतें और आधुनिक मोड्यूलर किचन अपने पाश में नहीं बांध पाए हैं। इन सब आडंबरों की बजाय यह लोग हरियाली, चौड़ी सड़कों और साधारण घरों को ही तवज्जो देते हैं।

यहां के प्रमुख आकर्षण

घरों कि खूबसूरत वास्तुशैली. यहां के घर साधारण दीवारों और छत वाले होते हैं, लेकिन मुख्य द्वार को आकर्षक बनाया जाता है और चारों ओर फैली हरियाली देख कर लगता है मानों कुदरत स्वयं आपको अपने घर आमंत्रित कर रही है। गांव में प्रवेश करते ही आप पाएंगे कि यहां सभी मकान एक ही आकार, डिज़ाइन और रंग के बने हैं। माना जाता है कि इससे पूरे इलाके को एकरूपता तो मिलती ही है, साथ ही प्रकृति से साथ यहां से स्थानीय निवासियों के अटूट रिश्ते का भी मुजहिरा होता है।

मिट्टी के कच्चे रास्ते. यहां के लाल मिट्टी से बने रास्ते पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करते हैं, जो आपको बीते किसी काल में ले जाते हैं। इस गांव में ना तो कोई वाहन चलता है और ना ही कहीं कोई शोर-शराबा होता है। इसलिए शहरी कोलाहल से दूर यहां आने पर असीम शांति और सुकून का अनुभव होता है।

पेरुरु गांव क्या करें

गांव में घूमें. आधुनिक वास्तुशैली में बने मकान तो आपको हर जगह मिल जायेंगे, लेकिन यहां के मकान आपको उसी काल में ले जायेंगे, जब जीवन साधारण और सामान्य हुआ करता था और जरूरतें भी बेहद कम हुआ करतीं थीं। यहां के घर प्राचीन वास्तुशैली से बने हैं, जिनमें बांस की छत और पेड़-पौधों से सजा प्रवेश द्वार होता है। इन सबसे यहां का पूरा माहौल ही बड़ा अलौकिक सा हो जाता है।

स्थानीय निवासियों से मिलें. यहां रहने वाले लोग साधारण जीवन और उच्च विचार के मंत्र में यकीन रखते हैं। इसलिए यदि आप यहां आने का कार्यक्रम बनाएं तो यहां के स्थानीय निवासियों से बातचीत करने के लिए समय ज़रूर निकालें। आपको निश्चित रूप से आंध्र प्रदेश की प्राचीन विरासत संजोये इस गांव से बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।

आने का सबसे अच्छा समय

पेरुरु गांव, आंध्र प्रदेश के पूर्व गोदावरी जिले में स्थित है, जो कि भीषण गर्मी और उमस भरे मौसम के लिए जाना जाता है। लेकिन यह गांव इतना ज़्यादा खूबसूरत है कि एक बार को आप गर्मी और उमस को यहां आकर भूल जाएंगे। और अगर आपको वाकई गर्मी से थोड़ी दिक्कत है तो आप यहां ठंड के मौसम में आइये। वैसे मौसम आड़े नहीं है तो यहां आप इस गांव में सालभर में कभी भी आ सकते हैं। 

कैसे पहुंचे

हवाई मार्ग. इस गांव से सबसे करीबी बड़ा शहर राजमुंद्री है, जिसका हवाई अड्डा मधुरपुडी में स्थित है जो कि हैदराबाद, बेंग्लुरु, चेन्नई और मदुरै जैसे शहरों से उड़ानों द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा है। यहां के लिए देश के कई अन्य शहरों से सीधी एवं संयोजित उड़ानों की व्यवस्था है। 

सड़क मार्ग. पेरुरु हेरिटेज विलेज, सड़कों द्वारा बहुत अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। अंतर्राज्यीय पर्यटन बसों द्वारा या लांग ड्राइव का लुत्फ उठाते हुए भी आप इस गांव तक पहुंच सकते हैं। अगर आप वाकई अपनी कार द्वारा एक मजेदार जर्नी की तैयार करने जा रहे हैं तो नोट कीजिए कि दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंग्लुरु से पेरुरु गांव की दूरी क्रमशः 2000 किमी, 1000 किमी, 1700 किमी और 210 किमी है।

रेल मार्ग. कदिरिदेवरपल्लि यहां का निकटतम रेलवे स्टेशन, जो इस गांव से 30 किमी की दूरी पर स्थित है। स्टेशन पर उतरने के बाद आपको इस गांव तक जाने के लिए स्थानीय टैक्सी या बस आसानी से मिल जाएंगे। कदिरिदेवरपल्लि-तिरुपति पैसेंजर यहां आने वाली एक प्रमुख ट्रेन है, जिसमें आप अपनी टिकट बुक करा कर यहां पहुंच सकते हैं।  

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