20°C / धुंधला

Story in Audio

आंध्र प्रदेश के तेलांगना में स्थित श्रीसेलम में नागार्जुनसागर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी एक ऐसी वन्य जगह है, जो प्रकृति प्रेमियों को बरबस ही अपनी ओर खींचती है। 3,569 वर्ग किमी में पांच जिलों तक फैली यह सेंचुरी तरह-तरह की वनस्पतियों और जीव-जन्तुओं की अकूत संपदा अपने अंदर समेटे है। इतना ही नहीं यहां आपको 150 से ज्यादा पक्षियों की दुर्लभ प्रजातियाँ देखने को मिलेंगी। वैसे तो यहां लंगूर, गीदड़ और अफ्रीकी लंगूरों के भी झुंड आप देख सकते हैं। लेकिन उससे भी दिलचस्प बात यह है कि यह सेंचुरी भारत का सबसे बड़ा बाघ-संरक्षित क्षेत्र भी है। इसलिए हर साल यहां भारी संख्या में सैलानी घूमने और प्रकृति को करीब से महसूस करने आते हैं। 

सेंचुरी का इतिहास

यूं तो यह सेंचुरी अपने प्राकृतिक वातावरण और जीव-जंतुओं के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन यहां आपको भगवान श्रीसेलम और देवी ब्रह्नारंभ के मंदिरों सहित अन्य ऐतिहासिक इमारतों के अवशेष भी देखने को मिलते हैं। कहा जाता है कि देवी ब्रह्नारंभ का रंग काफ़ी साफ था। इसलिए उन्हें मां पार्वती का अवतार माना जाता है। ऐसा भी माना जाता है कि किसी समय में यहां नागार्जुन विश्वविद्यालय हुआ करता था, जिसे एक दक्षिण भारतीय शिक्षक नागार्जुनाचार्य संचालित किया करते थे। इस विश्वविद्यालय के अवशेष आज भी यहां देखे जा सकते हैं। 

इसके अलावा यहां बहुत से बौद्ध मठ और विश्वविद्यालय भी हैं तथा स्वंय नागार्जुनचार्य भी महायान बौद्ध धर्म में आस्था रखते थे। इन सबके अलावा यहां अक्का महादेवी भीलम, दत्तारेया भीलम और कदलीवणम सहित गुफाओं में बने अनेकों मंदिर भी देखने को मिलते हैं। 

आधुनिक इतिहास के पन्नों से 

सन 1983 में यह क्षेत्र बाघ संरक्षण परियोजना के तहत शामिल किया गया था। वैसे इस जगह से जुड़ा एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि सन 1947 से पहले इस पूरे इलाके का आधे से ज़्यादा दक्षिणी हिस्सा अँग्रेज़ सरकार के कब्जे में हुआ करता था, जबकि उत्तरी भाग हैदराबाद की रियासत के अधिकार क्षेत्र में आता था। सन 1983 में यहां मात्र 40 बाघ मौजूद थे, जिनकी संख्या सन1989 में बढ़ कर 90 हो गयी। 

नागार्जुनसागर वन्य जीव सेंचुरी के प्रमुख आकर्षण

नागार्जुनसागर पर्वत श्रृंखला. यह क्षेत्र विशाल नल्लामलाई पर्वत श्रृंखला से घिरा हुआ है और पूरे इलाके में पहाड़ों की ऊंची-नीची चोटियां, ऊबड़-खाबड़ संकरे पथरीले रास्ते और पठार देखने को मिलते हैं। कहने का अर्थ यह है कि इस पूरे इलाके की भौगोलिक स्थिति रोमांच से भरपूर है, जो एडवेंचर प्रेमी सैलानियों को अपनी ओर आने का एक निमंत्रण सा देती प्रतीत होती है। साथ ही यहां का समृद्ध वन्य जीवन इस स्थान के पर्यावरणीय महत्व को भी और बढ़ा देता है। 

कृष्णा नदी. जब आप इस नदी के तट के पास पहुंचते हैं, तो 150 से भी अधिक प्रजातियों के पक्षी अलग-अलग स्वर में अपनी चहचहाट से आपका स्वागत करने लगते हैं। यहां से जितना खूबसूरत सूर्योदय का नज़ारा लगता है, उतना ही भव्य सूर्यास्त का दृश्य भी दिखाई पड़ता है। पूरी तरह प्राकृतिक ख़ज़ाने से समृद्ध इस स्थान पर आपको सांपों, कछुओं, घड़ियालों और मगरमच्छों सहित अनेकों जीव-जंतुओं की ढेरों प्रजातियाँ देखने को मिलेंगी। इसलिए यह कहना ग़लत ना होगा कि प्राकृतिक से प्रेम करने वालों के लिए यह स्थान र्स्वग के समान है। 

क्या करें

रोलापडु घास के मैदान. करीब 6 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला यह इलाका अनेकों प्रकार की सूखी और कंटीली झाड़ियों और लंबी घास से पटा पड़ा है। यहां आपको दुर्लभ काले हिरण के साथ-साथ दुर्लभ गोडावण भी देखने को मिल सकता है, जो लंबी टांगों वाला एक विशाल पक्षी होता है, जो कुछ-कुछ शर्तुमुर्ग की तरह दिखता होता है। 

जंगल में देखें अजीबो गरीब लकड़ियों की किस्में. यह जंगल अनेकों प्रकार की लड़की की किस्मों की लिए जाना जाता है। जैसे कि नल्लामडी और चिरुमनु यहां की स्थानीय लकड़ी की किस्म है। वैसे इसके अलावा आप यहां सागवान के जंगलों में घूमते हुए हिरण, सांबर और नीलगाय भी देख सकते हैं। इसलिए वन्य जीवन और वन्य जीवों में रुचि रखने वालों को यहां आना बहुत भाता है। 

नागार्जुनसागर वन्य जीव सेंचुरी जाने का सबसे अच्छा समय

सितंबर से जनवरी माह के बीच का समय यहां आने के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है। क्योंकि इन दिनों यहां का मौसम बहुत सुहावना होता है और जंगली जानवर भी ज्यादा दिखाई देते हैं। 

नागार्जुनसागर वन्य जीव सेंचुरी कैसे जाएं

हवाई मार्ग. देश के अलग-अलग हिस्सों से उड़ानों के ज़रिये तेलंगाना बहुत आराम से पहुंचा जा सकता है। यहां का दि राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, भारत में दिल्ली, पुणे और मुंबई के साथ-साथ देश के अन्य शहरों तथा विदेशों के महानगरीय शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। एयरपोर्ट से नागार्जुनसागर वाल्ङलाइफ सेंचुरी तक जाने के लिए 1 से 2 घंटे का समय लग सकता है। 

रेल मार्ग. सिंकदाबाद रेलवे जंक्शन यहां का सबसे क़रीबी रेलवे स्टेशन है। वैसे इसके अलावा काजीपट और वारंगल रेलवे स्टेशनों द्वारा भी तेलंगाना पहुंचा जा सकता है। दिल्ली, चेन्नई, पुणे और बेंग्लुरु से रेल मार्ग द्वारा तेलंगाना आराम से पहुंचा जा सकता है। 

सड़क मार्ग. हैदराबाद से तेलंगाना तक सड़क मार्ग द्वारा बहुत आसानी से पहुंचा जा सकता है। इसके अलावा दिल्ली, मुंबई और पुणे जैसे शहरों से आप यहां आसानी से पहुंच सकते हैं। इसके आपको एनएच-7, एनएच- 9, एनएच- 221 और एनएच- 222 से होते हुए यहां आना पड़ेगा। सड़क द्वारा यहां तक पहुंचने में आपको 14 से 27 घंटे तक का समय लग सकता है, जो कि आपके प्रस्थान बिंदु पर निर्भर करता है। 

एडोट्रिप के सर्किट प्लानर की मदद से अब यात्रा योजना बनाना हुआ और भी आसान। अब आप इस ख़ास शहर के लिए अपने मुताबिक यात्रा की योजना बनाएं । यहां आपको मिलेगा यात्रा से जुड़े हर एक सुझाव। क्लिक करें।  


  • वन्य जीवन

  • आंध्र प्रदेश

योजना बनाएं

+ गंतव्य स्थान जोड़ें

स्थान

0.0

रहने की जगह

भोजन

परिवहन

पर्यटक जगहें

ओवरऑल

उत्तर छोड़ दें:

  • रहने की जगह
  • पर्यटक जगहें
  • भोजन
  • परिवहन