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लामायुरू उर्फ युरू मठ प्राचीन तिब्बती बौद्ध मठों में से एक है जो भारत के जम्मू और कश्मीर के लेह जिले के लामायुरो में स्थित है। लामायुरू मठ का दूसरा नाम युंगद्रंग थारपालिंग मठ है। और अगर किंवदंती पर विश्वास किया जाए तो लेह के पश्चिम में लगभग 127 किमी दूर एक बड़ी झील है जो शाक्यमुनि बुद्ध के समय से ही वहाँ है। कहा जाता है कि यह झील कई नागों का भी घर है।    

इसके अलावा, यह भी कहा जाता है कि जब अरहाट मध्ययंतिका लामायुरू ने झील का दौरा किया और नागाओं को प्रसाद दिया, तो उन्होंने अपने साथ आए कर्मचारियों के साथ झील के मैदान में एक दरार बनाई ताकि पानी का रिसाव बाहर हो सके। इसके अलावा, उन्होंने यह भी भविष्यवाणी की थी कि भविष्य में इस स्थान पर सूत्र और तंत्र एकीकृत की शिक्षाएँ फल-फूल रही होंगी। 

लामायुरू मठ का इतिहास

अगस्त हर्मन फ्रेंके नाम के एक प्रसिद्ध बाइबिल विद्वान ने लोकप्रिय परंपरा के संदर्भ में, कहा है कि लामायुरु मठ लद्दाख में एक प्राचीन बॉन मठ था। इस नाम का अर्थ है “स्वस्तिक“ (अनंतकाल) और यह बॉन में एक प्रसिद्ध प्रतीक है। दिªकुंग के इतिहास के अनुसार, यह पहले एक घाटी थी जिसे लामायुरू मठ बनाने के लिए नरोपा नाम के एक लोकप्रिय भारतीय विद्वान द्वारा भरा और सुखाया गया था।

लामायुरु मठ के शीर्ष आकर्षण

मूनलैंड. लेह-कारगिल रोड पर स्थित लामायुरू के पास मूनलैंड काफी दिलचस्प परिदृश्य है ऐसा जो आपकी आंखों को मंत्रमुग्ध होने के लिए विवश कर देगा। ऐसा माना जाता है कि यहाँ के प्राकृतिक दृश्य चंद्रमा की चमक से मिलते-जुलते हैं। यही कारण था कि इस मठ का नाम मूनलैंड रखा गया और यह इसी नाम से प्रख्यात है। 

वनला गोम्पा. यह लामायुरू का उप-मठ है, जो यहाॅं कार्य करने वाले भिक्षुओं की आवश्यकता पूर्ती के साथ-साथ उन्हें आश्रय प्रदान करने के लिए भी जाना जाता है, विशेष रूप से उनकी जो दैनिक अनुष्ठान करने के लिए जिम्मेदार है। मंदिर की मुख्य मुर्ति में अवलोकितेश्वर को 11-प्रमुख रूप में दिखाया गया है जो अपने आप में देखने और अनुभव करने के लिए एक रहस्यमय चीज से कम नहीं है।  

लामायुरु मठ में करने योग्य चीजें

उल्यटोकपो. उल्यटोकपो उन पर्यटकों और यात्रियों के लिए पश्चिमी बेस कैंप के रूप में काफी लोकप्रिय है, जो लद्दाख जाने वाले होते हैं। यह जगह उन लोगों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है जो यात्रा करना पसंद करते हैं।  

युरू कबीगट. युरू कबीगट दो दिवसीय त्योहार है जिसे लद्दाख के कैलेंडर में प्रमुख त्योहारों में से एक माना जाता है। युरू कबीगट के दौरान, पारंपरिक नृत्य किया जाता है जिसमें तिब्बती बौद्ध धर्म की आवश्यक शिक्षाओं को दर्शाया जाता है।   

लामायुरू मठ की यात्रा का सबसे अच्छा समय

लामायुरू मठ की यात्रा करने का सबसे अच्छा समय जुलाई और अगस्त के बीच है, क्योंकि यही वह समय है जब युरू कबीगट होता है। इसके अलावा, यह दर्शनीय स्थलों की यात्रा के लिए भी एक अच्छा समय है। 

लामायुरु मठ कैसे पहुंचें

हवाई मार्ग. लामायुरू का अपना कोई हवाई अड्डा नहीं है। हालांकि, निकटतम हवाईअड्डा लेह में स्थित है जो 125 किमी की अनुमानित दूरी पर स्थित है। वहां से, आपको लामायुरु मठ तक पहुंचने के लिए परिवहन के अन्य साधनों को किराए पर लेना होगा। 

रेल मार्ग. इस जगह का अपना कोई रेलवे स्टेशन नहीं है। निकटतम रेलवे स्टेशन श्री वैष्णो देवी है जो श्री माता वैष्णो देवी कटरा रेलवे स्टेशन पर स्थित है और वहाँ से आपको अपने गंतव्य तक पहुँचने के लिए कैब या स्थानीय रूप से उपलब्ध परिवहन किराए पर लेना होगा। 

सड़क मार्ग. लामायुरु सड़क संयोजकता के साथ काफी अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। उधमपुर, जम्मू, श्रीनगर और लेह जैसे शहरों से इस मार्ग पर अक्सर चलने वाली बसें आप ले सकते हैं। लामायुरू मठ तक पहुंचने के लिए आप इनमें से किसी भी एक बस में आरक्षण ले सकते हैं।  

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