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कर्नाटक के पश्चिमी घाट में बसा यह किला, तीर्थहल्ली शिमोगा में स्थित है। इतिहास में दिलचस्पी रखने वालों के लिए यह एक शानदार टूरिस्ट स्पॉट है। इस किले का निर्माण मूल रूप से 9 वीं शताब्दी के दौरान किया गया था। यह किला कई वंशों के उत्थान और पतन का साक्षी रहा है। 

यह किला अपनी शानदार नक्काशी के लिए जाना जाता है। लगभग 8 किमी के क्षेत्र में फैला है, जिसके कई द्वार है। चौथे द्वार में हिंदू संस्कृति से जुड़ी कई मूर्तियों को आप देख सकते है। जिसमें, सशस्त्र योद्धाओं, सूर्य, चंद्रमा, हाथी और सांपों की शानदार मूर्तियों को देख सकते है। इसके अलावा आपको यहां पर कई प्रसिद्ध मंदिरों जैसे काशी विश्वनाथ मंदिर, लक्ष्मीनरायण मंदिर और शिकारीेश्वर मंदिर की झलक देखने को मिलेंगी।

कावलीदुर्गा किला का इतिहास

कावलीदुर्गा 9 वीं शताब्दी में बनाया गया था और 14 वीं शताब्दी में फिर चेलुवरंगप्पा द्वारा पुनर्निमाण किया गया था। यह किला केलाडी के कई मजबूत और प्रतिष्ठित शासकों के अधीन रहा, जो विजयनगर साम्राज्य के सामंती युग में बड़े नाम थे। इसके बाद 1763 में किले पर हैदर अली और टीपू सुल्तान द्वारा कब्ज़ा कर लिया गया था। इनके ही शासन काल में किले का सौंदर्यीकरण किया गया था।

कावलीदुर्गा स्थान का हिंदू पौराणिक कथाओं के साथ महत्वपूर्ण संबंध रहा है। लोककथा के अनुसार यह क्षेत्र भगवान परशुराम के निवास स्थान के रूप में जाना जाता है। यह भी माना जाता है कि महर्षि वाल्मीकि और अगस्त्य जैसे महान ऋषि यहां लंबे समय तक यहां रहा करते थे और द्वापर युग के दौरान पांडव भी कुछ समय के लिए यहां रहे थे।

कावलीदुर्गा किला का मुख्य आकर्षण

श्रीकंतेश्वर मंदिर- यह राजशी मंदिर किले के केन्द्र में स्थित है। यह मंदिर अपने सुंदर नक्काशी और विशाल स्तंभ के लिए जाना जाता है। 

काशी विश्वनाथ मंदिर- यह किले के चौथे दरवाज़े में इस्लामी वास्तुकला के रूप में तैयार किया गया है। इस तरह का मिश्रण एकता को दर्शाता है। 

इस किले में आप कुछ वस्तुओं को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाएंगे, जो उस युग में इस्तेमाल की जा रही थीं। उदाहरण के लिए, घोड़े के अस्तबल, पांच-बर्नर पत्थर के स्टोव, पूजा कक्ष और यहां तक कि स्विमिंग पूल भी हैं।

कावलीदुर्गा किला घूमने का सही समय

कर्नाटक भारत के सबसे नम स्थानों में से एक माना जाता है, इसलिए गर्मियों के मौसम में यहां गर्मी रहती है। सर्दियों का मौसम कावलीदुर्गा किला घूमने के लिए अनुकूल माने जाते है।

कैसे पहुंचे?

हवाई मार्ग- निकटतम हवाई अड्डा मेंगलोर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है जो मुख्य रूप से कर्नाटक राज्य और विदेशों सहित सेवा प्रदान करता है। हवाई अड्डे से कावलीदुर्गा किला लगभग 129 किमी की दूरी पर स्थित है, जिसे आप कैब के माध्यम से आसानी से तय कर सकते है। हवाई अड्डा भारत की सर्वश्रेष्ठ एयरलाइन सेवाओं के साथ अन्य राज्यों से अच्छी तरह से जुड़ी हुई है।

दिल्ली- इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा से स्पाइस जेट और इंडिगो की सुविधा है। हवाई किराये की कीमत 5,400 रूपये से शुरू होती है।

कोलकाता- नेताजी सुभाष चंद्र बोस हवाई अड्डे से स्पाइस जेट की सुविधा है। हवाई किराये की कीमत 5,900 रूपये से शुरू होती है।

मुंबई- छत्रपति शिवाजी टर्मिनल हवाई अड्डे से स्पाइस जेट और इंडिगो की सुविधा है। हवाई किराये की कीमत 2,700 रूपये से शुरू होती है।

अहमदाबाद- अहमदाबाद एयरपोर्ट से स्पाइस जेट की सुविधा है। हवाई किराये की कीमत 4,400 रूपये से शुरू होती है।

रेल मार्ग- निकटतम रेलवे स्टेशन शिमोगा टाउन रेलवे स्टेशन है, जो कि 82 किमी की दूरी पर स्थित है। यह एक अच्छी तरह से स्थापित स्टेशन है जो कर्नाटक के पड़ोसी शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। स्टेशन पहुंचने के बाद, आप कावलीदुर्गा किला तक पहुंचने के लिए टैक्सी सेवा ले सकते हैं। सड़क यात्रा में लगभग एक घंटे का समय लग सकता है।

सड़क मार्ग- कावलीदुर्गा किला, कर्नाटक के शिमोगा जिले में स्थित है जो कर्नाटक के प्रसिद्ध तीर्थहल्ली शहर से सिर्फ 11 मील दूर है। यह सड़क मार्ग द्वारा आसपास के क्षेत्रों से अच्छी तरह से जुड़ी हुई है।

बेंगलुरू- NH-48 के माध्यम से 344 किमी

चेन्नई-  NH-48 के माध्यम से 719 किमी

कोच्चि- NH-66 के माध्यम से 555 किमी

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