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भारत में घूमने तथा प्रकृति के आंनद लेने के लिए एक पर एक जगहें हैं। कई बार यह होता है कि हमें मालुम ही नहीं होता है उस जगह के बारे में। प्रकृति में गोद में ले जाने वाला ऐसा ही एक जगह है दूधसागर झरना। इसके नाम से ही इसका मतलब साफ़ है। दूधसागर यानि दूध का झरना। इसे आप आम झरने की तरह बिलकुल भी कल्पना ना करें। इसकी खूबसूरती ऐसी है कि जिसे देखकर आपकी आँखें और मुँह दोनों के दोनों खुले रह जाएंगे। 

इस झरने की खूबसूरती और इसके आसपास की चीज़ों का आंनद लेने में जो मज़ा है, वो तो है ही। अगर आप पहली बार यहां की यात्रा करेंगे तो, आपको बता दें कि जिस तरह के रास्ते है यहां तक पहुंचने के लिए वो आपको दूधसागर झरने को देखने के और ज्यादा उत्साहित कर देगी। ऐसा इसलिए क्यूंकि यह झरना मोल्लेम नेशनल पार्क के अंदर स्थित है और इसके आसपास की जगहें जहां से आप गुजरेंगे वो जंगल से घिरी हुई है और यही चीज़ पर्यटकों को काफी आकर्षित करती है साथ ही झरने को देखने के लिए उत्साहित भी। 

इन सब के अलावा, दूधसागर भारत का एकमात्र ऐसा झरना है, जो दो राज्यों की सीमा पर स्थित है। अब आप ये सोच रहे होंगे कि आखिर में ये जगह है कहां, तो चलिए हम आपको बताते हैं। 

पहले नहीं था इतना प्रचलित 

भारत के गोवा और कर्नाटक राज्य की सीमा पर तथा पणजी से 60 किमी की दूरी पर स्थित दूधसागर झरना 5-6 साल पहले इतना लोकप्रिय नहीं था, जितना आज है। इसको लोकप्रिय बनाने की पीछे हम भारतीयों का फिल्मों के प्रति प्रेम है। आपको याद होगा, दीपिका पादुकोण और शाहरुख़ खान की एक फिल्म आई थी चेन्नई एक्सप्रेस उसमे इस झरने को बड़ी खूबसूरती से दिखाया गया जिसके बाद से लोगो के मन में इस झरने को देखने की इच्छा पैदा हुई और यह जगह काफी लोकप्रिय बन गया। 

दूधसागर झरने की ख़ास बातें

यह झरना केवल भारत में ही नहीं बल्कि विश्व के भी सुंदर और लोकप्रिय झरनों में से एक है। 310 मीटर (1017 फीट) ऊंचाई और लगभग 30 मीटर (100 फीट) चौड़ाई वाला यह झरना सबसे ऊँचे झरनों की सूची के मुताबिक, भारत में 5 वें स्थान पर जबकि विश्व में 227 वें स्थान पर है। 

इतना ही नहीं, दिलचस्प बात तो यह है कि यहां हजारों फ़ीट से गिरते दूध जैसे दिखने वाले इस झरने के बीच से ट्रेन भी गुजरती है। उम्मीद करते हैं कि इसको पढ़कर आपके दिमाग में भी इस विशाल झरने से होकर जाती रेलगाड़ी का दृश्य दिखने लग गया होगा। सी ऑफ़ मिल्क कहा जाने वाला यह झरना सिर्फ पर्यटकों के बीच ही नहीं बॉलीवुड के बीच भी अच्छा ख़ासा मशहूर है। 

दूधसागर क्यूं पड़ा इसका नाम 

एक कहानी के अनुसार, पश्चिमी घाटों के मध्य एक झील हुआ करती थी जहां एक राजकुमारी अपनी सखियों सहित स्नान करने प्रतिदिन आती थी। स्नान के बाद वह घड़े भर दूध का सेवन करती थीं। एक दिन वह झील के जल में अठखेलियाँ कर रही थीं। तभी वहां से जाते एक नवयुवक की नज़र राजकुमारी पर पड़ी और वह वहीं रुक कर उन्हें निहारने लगा। अपनी लाज रखने हेतु राजकुमारी की सखियों ने दूध का घडा झील में उड़ेल दिया ताकि दूध की परत के पीछे वे स्वयं को छुपा सकें। कहा जाता है कि, तभी से इस झरने का दूधिया जल लगातार बह रहा है। इस रोचक कथा को सुनने के बाद जब आप भी इस झरने के जल को देखेंगे तो वह अवश्य आपको दूधिया लगेगी।

दूधसागर झरना के खुलने का समय और शुल्क 

पर्यटकों के लिहाज़ से अच्छी बात यह है कि, यह झरना हर रोज खुलता है और आप यहां सुबह 9 बजे से लेकर शाम के 6 बजे तक जा सकते हैं। कोलेम से यहां पहुंचने के लिए जीप सफारी की सुविधा है। आपको इस जीप सफारी की सफर में कुछ छोटी-छोटी नदियां भी मिलेगी जिनमें से आपकी जिप्सी निकलकर कर जाएगी जो कि बहुत आनंद दायक होता है जिसका शुल्क 400 रुपया प्रति व्यक्ति है। इसके अलावा, गोवा वन विभाग के गेट पर ही आपको एक रसीद कटानी होती है, जिसके लिए प्रति व्यक्ति शुल्क 50 रुपया है। 

कोलेम नामक स्थान से जीप के माध्यम से आपके पर्यटन स्थल की दूरी लगभग 40-45 मिनट की हैं लेकिन जीप से उतरने के बाद लगभग 20 मिनट का सफर आपको पैदल ही तय करना होता हैं। हालांकि, वो अलग बात है कि वहां के मनोरम दृश्य की वजह से आपको समय का पता ही नहीं चलेगा। 

दूधसागर झरने के आसपास घूमने वाली ऐसी ही मज़ेदार जगहें 

-मोल्लेम राष्ट्रीय उद्यान 

-नेत्रावली झरना  

-तांबडी सुरला महादेव मन्दिर 

-भगवान महावीर वन्यजीव अभयारण्य

-सह्याद्री मसाला फार्म 

दूधसागर झरना जाने का अच्छा समय 

यदि आप गोवा के इस आकर्षित पर्यटक स्थल दूधसागर झरने जाने की योजना बना रहे हैं और सोच रहे हैं कि कौन से मौसम में इस स्थान पर जाना सबसे अच्छा रहेगा। तो आइये हम आपकी इस समस्या का भी समाधान कर देते हैं। 

दूधसागर झरना जाने के लिए सबसे अच्छा समय बारिश के मौसम का माना जाता हैं क्यूंकि इस दौरान वर्षा के पानी की वजह से दूधसागर झरना अपने चरम पर होता है और इसकी खूबसूरती देखने लायक होती हैं। दूसरी बात यह है कि, बारिश का मौसम भी पर्यटकों के लिए लुभावना होता हैं, जिससे मानसून के मौसम में यहां पर्यटकों का जमावड़ा भी बहुत अधिक होता हैं। 

गर्मी के मौसम में भी आप यहां आ सकते हैं लेकिन गर्मी के मौसम में दूधसागर झरने के आसपास आपको गर्म मौसम की थोड़ी मार झेलनी पड़ सकती हैं।

सुरक्षा चेतावनी 

दूधसागर वॉटर फॉल पर आपको एक लाइफ जैकेट भी मिल जाएगी जिसका खर्च सिर्फ 30 रूपये होता है। बिना लाइफ जैकेट के पानी में उतरना थोड़ा खतरनाक साबित हो सकता हैं और अगर आपको तैरना नहीं आता हैं तो आप ज्यादा गहराई में ना जाएं और लाइफ जैकेट जरूर खरीदें। 

दूधसागर झरने के पास उपलब्ध होटल और जलपानगृह 

दूधसागर स्पा रेसॉर्ट – मोलें गाँव में गोवा पर्यटन विभाग का दूधसागर रेसॉर्ट है। यह उस स्थल से अत्यंत निकट है जहां से जीप गाड़ी की सुविधाएं उपलब्ध होती हैं। यहाँ अत्यंत आकर्षक एवं सुख-सुविधाओं से लैस तम्बू जैसे घर उपलब्ध हैं। यहाँ ठहर कर आप जंगल में ठहरने का आनंद प्राप्त कर सकते हैं। 

जंगल कैफ़े – यह एक प्यारा सा बगीचानुमा जलपानगृह है। इसकी छत अनेक लटकते गमलों द्वारा बनायी गयी हैं जिनमें तरह तरह के पौधे उगाये हुए हैं।

गोवा का भोजन और लिबास 

गोवा ऐसी जगह है जहां लोग जलवायु के अनुसार कपड़े पहनते हैं। आमतौर पर, लोग सूती कपड़े पहनते हैं। गोवा की कैथोलिक महिलाएं आमतौर पर गाउन और अन्य पश्चिमी पोशाक पहनती हैं। जबकि, हिंदू महिलाएं पारंपरिक पोशाक पहनती हैं जो कि नव-चरखी साड़ी है। गोवा के कुछ अन्य पारंपरिक परिधान पानो भजु और वकाल हैं। जबकि यहां के पुरुष शहरी और आधुनिक कपड़े पहनते हैं। मछुआरों को ज्यादातर उजला शर्ट पहने हुए देखा जाता है। 

गोवा के भोजन की बात करें तो, यह काफी स्वादिष्ट और पुर्तगाल, हिंदू और मुस्लिम शैलियों का मिश्रण होता है। गोवा के लोग खाना बनाते समय सिरके और नारियल के दूध का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं।

दूधसागर झरने तक कैसे पहुंचे?

जैसा कि हमने पहले बताया है कि यह झरना गोवा और कर्णाटक राज्य की सीमा पर है इसलिए यहां जाने के दो रास्ते हैं। एक गोवा से और दूसरा कर्णाटक से। 

रेल मार्ग - यहां पहुंचने के लिए नज़दीकी रेलवे स्टेशन कोलेम है। दूसरा निकटतम स्टेशन मडगांव है जहां से इस जगह की दूरी 40 किमी है। जो कि दिल्ली, पुणे, मुंबई, कोलकाता और हैदराबाद सहित अन्य प्रमुख शहरों से कनेक्टेड है। 

सड़क मार्ग - किसी ख़ास या फिर दोस्तों के साथ सड़क मार्ग से गोवा की यात्रा करना काफी रोमांचक और यादगार साबित हो सकता है। जिसके लिए आप दिल्ली, पुणे, हैदराबाद, कोलकाता तथा बेंगलुरु से अपने लोकेशन के आधार पर NH 48, NH 50, NH 52 जैसे रूटों का चयन कर सकते हैं। 

हवाई मार्ग - अगर आपका बजट अनुकूल है फिर तो यहां की यात्रा के लिए हवाई यात्रा आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है। इसके लिए नजदीकी हवाई अड्डा डाबोलिम है, जो कि पणजी से 29 किमी दूर है। यह हवाई अड्डा दिल्ली, पुणे, मुंबई, कोलकाता और हैदराबाद सहित अन्य प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। 

एडोट्रिप के सर्किट प्लानर की मदद से अब यात्रा योजना बनाना हुआ और भी आसान। अब आप इस ख़ास शहर के लिए अपने मुताबिक यात्रा की योजना बनाएं । यहां आपको मिलेगा यात्रा से जुड़े हर एक सुझाव। क्लिक करें।  


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