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क्या गोवा की पहचान और उसके प्रति पर्यटकों का आकर्षण केवल कुछेक प्रचलित समुद्री तटों की ही वजह से है? शायद नहीं, क्योंकि जैसे ही आर गोवा के शांत स्थलों की चाह में निकलते हैं तो कोलवा जैसे समुद्री तट बांहें फैलाए दिखते हैं। दक्षिणी गोवा स्थित कोलवा बीच, गोवा के कुछ बेहद खूबसूरत समुद्र तटों में गिना जाता है। इसकी खूबी यह है कि उत्तरी गोवा के समुद्र तटों की तरह यहां भीड़-भाड़ नहीं होती और यह तट अपेक्षाकृत शांत रहता है। 

वैसे यह बीच गोवा के सबसे प्राचीनतम तटों में से एक होने के साथ-साथ यहां का सबसे लंबा समुद्री तट भी है। कुछ समय एकांत में बिताने के शौकीनों को यहां का शांत और खूबसूरत माहौल खासा लुभाता है। सफेद रेत के किनारे लगे नारियल के ऊंचे-ऊंचे पेड़ इस जगह की खूबसूरती में इजाफा कर देते हैं और सूर्यास्त के समय समुद्र किनारे टहलने के शानदार अनुभव को तो कभी भूला ही नहीं जा सकता। इस लिहाज से यहां के निवासी वाकई खुशकिस्मत हैं क्योंकि उन्हें यह मौका हर शाम मिलता है।

कोलवा बीच का इतिहास 

किसी जमाने में कोलवा एक विशाल बंजर इलाका हुआ करता था, जहां से अरब सागर का खूबसूरत नजारा दिखाई देता था। फिर मुग़ल और आदिल शाही राजवंश के शासकों को गोवा का उत्तरी और पहाड़ी हिस्सा इतना पसंद आया कि उन्होंने वहां के साथ-साथ यहां भी किलों और गढ़ों का निर्माण करवाया।  
लेकिन 1510 से 1961 के बीच यह इलाका पुर्तगालियों के कब्जे में रहा। तब इसे डॉक्टर डीओगो रोड्रिग्स की वंशज कहे जाने वाले रोईज़ नामक पुर्तगाली परिवार का गांव माना जाता था। उसे लोग कोलवा का भगवान मानते थे। कहा जाता है कि वह पहला शख्स था जिसने 1551 में यहां पहले पुर्तगाली वास्तुशैली से बने घरों का निर्माण कराया था। तब यह पूरा समुद्र तट भी उसी का हुआ करता तह और इसे प्राईआ दा कोलवा का नाम से जाना जाता था।

कोलवा बीच क्यूं जाएं 

अगर आप किसी ऐसी जगह घूमने जाना चाहते हैं, जहां प्रकृति की गोद में कुछ लजीज व्यंजनों का लुत्फ़ उठा सकें, तो निश्चित रूप से यह जगह आपको बहुत पसंद आयेगी। समृद्ध इतिहास, खूबसूरत संस्कृति और नायब वास्तुशैली की धरोहर समेटे यह समुद्र तट अपने आप में बेहद अद्भुत है और यही वजह है कि सैलानी बरबस यहां खिंचे चले आते हैं।

कोलवा बीच के प्रमुख आकर्षण 

वाटर स्पोर्ट्स: यहां बनाना बोट और मोटर बोट की सवारी जैसे कुछ बेहद रोमांचकारी पानी के खेलों का लुत्फ़ तो उठाया जा ही  सकता है, साथ ही समुद्र का यह हिस्सा तैराकी के लिए भी पूरी तरह सुरक्षित है। इसलिए यहां आने पर आपको तैरने के लिए सुरक्षित हिस्सों में लाल झंडे लगे दिख जायेंगे।

पाउडर जैसी सफेद रेत: यहां चारों ओर फैली सफेद रंग की पाउडर जैसी रेत विशेष रूप से लोगों को आकर्षित करती है और साथ में लगे नारियल के ऊंचे-ऊंचे पेड़ इस पूरे इलाके की सुंदरता को बढ़ा देते हैं। इस सबके अलावा यहां बने आकर्षक घर भी सैलानियों को अपनी साज-सज्जा की वजह से खासे प्रभावित करते हैं। 

बेनौलिम गांव और समुद्र तट: यहां से दक्षिण की तरफ करीब दो किमी आगे चलने पर स्थित इस जगह बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और पर्यटक घूमने आते हैं। हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान परशुराम द्वारा चलाया गया तीर इस जगह के समीप कोंकण क्षेत्र में आकर गिरा था।

कोलवा बीच क्या करें 

खरीदारी - शॉपिंग के शौकीनों को यह जगह खासी पसंद आती है, क्योंकि यहां के स्थानीय बाज़ार से आप खूबसूरत कपड़े, आभूषण और जूट से बनी वस्तुएं खरीद सकते हैं।

छोटे बड़े रेस्तरां - यहां आपको अनेकों ऐसे छोटे बड़े रेस्तरां मिल जायेंगे, जहां से आप अपनी जेब के हिसाब से बेहद लजीज वेज और नॉन वेज व्यंजनों का लुत्फ़ उठा सकते हैं। 

यहां की रंगारंग नाईट लाइफ - गोवा वैसे भी अपनी रंगीन रातों के लिए जाना जाता है। तो यहां भी ऐसे अनेकों नाईटक्लब और बार हैं, जहां आप दोस्तों के संग मौज-मस्ती करने जा सकते हैं।

कोलवा बीच कब जाएं

यहां घूमने के लिए दिसंबर और जनवरी के महीने सबसे शानदार माने जाते हैं, क्योंकि इस समय यहां का मौसम बहुत सुहावना रहता है।

खान-पान और पहनावा 

गोवा वासियों को गोआन के नाम से जाना जाता है। यह लोग अपनी शानदार मेहमाननवाजी के लिए काफी प्रसिद्ध हैं। यहां लोग चटक और शोख रंगों के कपडे पहनना पसंद करते हैं। महिलाएं 9 गज लंबी साड़ी पहनती हैं और साथ ही खूबसूरत पारंपरिक आभूषण भी पहनती हैं। यहां के पुरुष अक्सर चटक रंगों की कमीज और शॉर्ट्स पहनते हैं। गोवा में बहुत सी जनजातियां भी निवास करती हैं, जिनमे से एक है काश्ती जनजाति, जो सिर्फ अधोवस्त्र पहनते हैं और कंधों पर कम्बल लेकर घूमते हैं, जिसे कुनबी पल्लू कहा जाता है। यदि यहां के खान-पान की बात करें तो मछली, करी और चावल यहां के मुख्य आहार है। वैसे यहां का खाना बेहद स्वादिष्ट होता है, जिस पर कोंकणी, ब्राजील और पुर्तगाली खाने की गहरी छाप दिखाई देती है। 

कोलवा बीच कैसे पहुंचे

हवाई मार्ग. डैबोलिम हवाई अड्डा, गोवा का निकटतम हवाई अड्डा है और दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता औप पुणे सहित देश के कई अन्य शहरों से घरेलू उड़ानों द्वारा जुड़ा है। एयरपोर्ट से आप कैब या कुछ अन्य स्थानीय परिवहन सेवाओं द्वारा कोलवा बीच पहुंच सकते हैं। 

सड़क मार्ग. अपने दोस्तों या प्रियजनों के साथ रोड ट्रिप के यादगार पल संजोते हुए गोवा की यात्रा बहुत ही रोमांचक हो सकती है। दिल्ली, पुणे, हैदराबाद, बेंग्लुरु जैसे शहरों से आप आसानी से सड़क मार्ग द्वारा गोवा पहुंच सकते हैं। यहां आने वाली सड़के बहुत अच्छी हैं और अलग-अलग शहरों से बहुत अच्छी तरह जुड़ी भी हैं। यहां आने के लिए आप एनएच- 48, एनएच- 50 और एनएच- 52 ले सकते हैं।   

रेल मार्ग. करमाली रेलवे स्टेशन, यहां से सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है। दिल्ली, पुणे, हैदराबाद और कोलकाता जैसे शहरों से आप यहां आसानी से पहुंच सकते हैं। 

एडोट्रिप के सर्किट प्लानर की मदद से अब यात्रा योजना बनाना हुआ और भी आसान। अब आप इस ख़ास शहर के लिए अपने मुताबिक यात्रा की योजना बनाएं । यहां आपको मिलेगा यात्रा से जुड़े हर एक सुझाव। क्लिक करें।  


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