23°C / धुंधला

Story in Audio

कुरनूल या कर्नूल, आप चाहे जैसे पुकार सकते हैं। लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि यहां आने पर आप इस शहर में ऐसे खो से जाते हैं कि ध्यान ही नहीं रहता कि सही उच्चारण क्या है। फिर इससे कोई फर्क भी तो नहीं पड़ता। खैर, आंध्र प्रदेश राज्य के बड़े शहरों में से एक कर्नूल एक ऐसी शानदार जगह है, जहां हर एक सैलानी को ज़रूर जाना चाहिये। रायलसीमा (अनंतपुर, चित्तूर, कडपा और कर्नूल) के गेटवे के रूप में मशहूर यह जगह कई अन्य मायनों में भी खासी महत्वपूर्ण मानी जाती है।  

अपने समृद्ध ऐतिहासिक महत्व और कुछ बेहद प्राचीन एवं ऐतिहासिक स्मारकों और मंदिरों के चलते ऐसा लगता है कि यह शहर हर पल आपसे अपने अतीत के बारे में कुछ साझा करना चाहता है। प्राकृतिक नज़ारों से लेकर शानदार स्थलों तक और प्राचीन मंदिरों से लेकर ऐतिहासिक इमारतों तक यहां इस शहर में वो सबकुछ देखने को मिलता है, जो एक सैलानी होने के नाते आपकी जिज्ञासाओं को शांत कर सकता है। हालांकि यह शहर दिलचस्प ज़रूर है, लेकिन थोड़ा पेचीदा भी है। यहां की बेलम गुफाएं कुदरत की किसी पहले की तरह दिखती हैं, तो दूसरी तरफ बिड़ला मंदिर और साईं बाबा मंदिरों में जाकर मन को असीम शांति सी मिलती है।   

कर्नूल का इतिहास

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अनुसार कर्नूल के आस-पास मिली गुफाओं की चट्टानों पर उकेरी गयी चित्रकारी करीब 30 से 40 हजार वर्ष प्राचीन है, जो दर्शाता है कि कर्नूल का अस्तित्व पुरापाषाण से भी पहले का है। इस अलावा विजयनगर साम्राज्य काल के दौरान यह एक प्रमुख केन्द्र हुआ करता था, जहां कई दक्षिण भारतीय राजाओं ने शासन किया। इनमें चोल और काकतीय राजवंश प्रमुख थे। यहां मौजूद प्रसिद्ध कर्नूल किले का निर्माण राजा आच्युता राय द्वारा उसी युग में करवाया गया था। यही नहीं फारसी और अरबी में लिखे गये कई शिलालेखों से 17वीं शताब्दी में मुगलकाल के प्रमाण भी मिलते हैं, जो दर्शाते हैं कि उस समय भारत पर औरंगजेब का राज था। 

घूमने के मुख्य स्थल

बेलम गुफाएं. भारत में स्थित कुछ सबसे बड़ी गुफाओं में से एक बेलम गुफा में पर्यटकों और स्थानीय लोगों को ही जाने की अनुमति है। अपने बड़े रास्तों, गलियाओ, आड़ी-तिरछी गलियों के लिए प्रसिद्ध इन गुफाओं का प्रमुख आकर्षण स्टेलैग्माइट और स्टेलैक्टाइट होते है। प्रकृति की यह असाधारण कृति दरअसल गुफा की छत से होने वाले निरंतर टपकाव से फर्श पर जमा हुए चूने के स्तंभ होते हैं जो अपने चरम पर बेहद नुकीले हो जाते हैं तथा इस अद्भुत संरचना में पत्थर का अवरोही निपेक्ष अकल्पनीय सा लगता है। यहां प्रकृति की कई जटिल रूपरेखाएं और प्रक्रियाएं देखी जा सकती हैं, जिससे इस जगह का प्राकृतिक महत्व के साथ-साथ एक पर्यटक के रूप में आपकी दिलचस्पी भी बढ़ जाती है।   

रोल्लापड़ु वन्यजीव अभयारण्य. कर्नूल जिले में ही करीब 614 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैली यह वाइल्डलइफ सेंचुरी प्रकृति क बेहद सुंदर नजारों और जीव जंतुओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां कई दुर्लभ प्रजाति के जीव-जंतुओं के साथ-साथ पक्षी और सरीसृप भी देखने को मिल सकते हैं और वनस्पती प्रेमियों के लिए यहां जानने और खोजने को बहुत कुछ है। जंगली जानवों के संरक्षण हेतु यहां बनाई गयी एक मानव निर्मित सैलानियों के खास आकर्षण का केन्द्र रहती है।  

ओरवाकल्लू रॉक गार्डन. क्या पत्थर भी बोलते हैं? क्या पत्थरों की सुंदरता भी आकर्षित करती है? इन तमाम बातों का जवाब हां में दे भी दिया जाए तो आपकी उत्सुकता ओरवाकल्लू रॉक गार्डन आये बिना शांत नहीं हो सकती। क्योंकि यहां आपको आग्नेय शैल और चट्टानों की अभूतपूर्व खूबसूरती निहारने का मौका मिलता है। बेहद अद्भुत किस्म की चट्टानों और विशाल पत्थरों वाला यह स्थल सैलानियों को कई तरह की मनोरंजक गतिविधियों के लिए आकर्षित करता है। पर्यटक यहां आकर बोटिंग का भी मजा ले सकते हैं। यहां स्थित रेस्तरां आदि में परिवार के संग पिकनिक मना सकते हैं तथा यहां स्थित गुफा संग्रहालय आपके ज्ञानवर्धन में अहम भूमि सकता है। रोमांच प्रेमी सैलानी यहां हाइकिंग का लुत्फ उठा सकते हैं।   

यागंति. भगवान शिव को समर्पित यहां स्थित यागंतिस्वामी मंदिर असंख्य भक्तों की आस्थास्थली है, जो आज एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल के रूप में भी उभर रहा है। यहां आकर आपको वातावरण में एक अलग प्रकार की आध्यात्मिक शांति और सुकून के साथ-साथ यहां की आश्चर्यचकित कर देने वाली समृद्ध संस्कृति के भी दर्शन होते हैं। यहां स्थापित भगवान की मूर्ति को एक ही पत्थर से तराशकर बनाया है, जो कारीगरी का नायाब नमूना प्रतीत होती है। भगवान शिव की आराधना के लिए यहां भक्तों का भारी संख्या में जमावड़ा लगता है।  

क्या करें

जानें वास्तु-कला के बारे में. अतीत को लेकर इच्छुक और जिज्ञासु पर्यटकों के साथ-साथ कर्नूल उन सैलानियों को भी बहुत भाता है, जो प्राचीन मंदिरों के वास्तुशिल्प और कला में भी दिलचस्पी रखते हैं। अगर आप कुछ ऐसे ही लोगों में से हैं, तो समझिये कि आप सही जगह आये हैं। यहां बहुत से ऐसे स्थान और मंदिर इत्यादि हैं, जहां आपको असीम शांति का अनुभव होता है और आप अतीत के साथ खुद को जोड़कर देख सकते हैं। यहां दक्षिण भारतीय वास्तु शैली में बने कुछ बेहद खूबसूरत मंदिर जैसे- श्री अंजनीस्वामी मंदिर, साईं बाबा मंदिर और बिरला मंदिर देखे जा सकते हैं, जो प्राचीन विरासत का प्रतीक माने जाते हैं। 

महानदी गांव की सैर. वैसे तो पूरे कर्नूल में कई गांव हैं, लेकिन महानदी गांव में कुछ ऐसी खासियतें हैं, जिसकी वजह से सैलानी खुद ब खुद खिंचे से चले आते हैं। प्रकृति की सुंदरता में चार चांद लगाते यहां के घने जंगलों से घिरा यह गांव असल में नल्लमाला पहाड़ियों के पूर्व में स्थित है, जहां तक पहुंचने की यात्रा बड़ी रोचक होती है। इस अलावा यह गांव अपने नौ नंदी मंदिरों जैसे- महानंदी, शिवनंदी, विनायकनंदी, सोमनंदी, प्रथमनंदी, गरुणनंदी, सूर्यनंदी, कृष्णनंदी और नागनंदी के लिए भी खासा प्रसिद्ध बताया जाता है। 

पर्व, त्यौहार और सांस्कृतिक गतिविधियां

लांगेस्टर विंटर फेस्टिवल. रामोजी फिल्म सिटी में होने वाला यह सालाना महोत्सव पूरी तरह से मनोरंजन और रोमांच को समर्पित होता है, जिसमें शामिल होने वालों के लिए अनेकों हैरतअंगेज आकर्षण होते हैं, साथ ही होता है एक सिने मैजिक टूअर, जिसमें बेहद प्रसिद्ध और रोमांचकारी फिल्मों की लोकेशन पर कुछ हैरान कर देने वाले लाइव शोज़ आयोजित किये जाते हैं। भारतीय सिनेमा में रुचि रखने वालों के लिए यह फेस्टिवल कभी ना भूलने वाला अनुभव होता है। 

लुम्बिनी फेस्टिवल. हर साल दिसंबर माह के दूसरे सप्ताह में मनाए जाने वाले इस तीन दिवसीय लुम्बिनी फेस्टिवल का आयोजन हैदराबाद के नागार्जुन सागर में किया जाता है। भगवान बुद्ध को समर्पित इस महोत्सव के दौरान यहां कला और शिल्प से जुड़े अनेकों आयोजन किये जाते हैं, जिनमें भाग लेने के लिए पूरी दुनिया से लोग आते हैं। इसमें भाग लेने वाले कलाकार अपने-अपने हुनर के ज़रिये महात्मा बुद्ध के जीवन और उनकी शिक्षाओं का प्रदर्शन करते हैं। 

आने का सबसे अच्छा समय 

अक्तूबर से मार्च के महीनों में यहां का मौसम बढ़िया रहता है। इसलिए घूमने के लिहाज से यही दिन सबसे अच्छे माने जाते हैं। 

कुर्नूल कैसे पहुंचे

हवाई मार्ग. राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, यहां से सबसे निकटतम हवाई अड्डा है। यह एक व्यवस्थित और स्थापित एयरपोर्ट है, जहां कई जानी मानी एयरलाइंस दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, और चेन्नई जैसे बड़े शहरों के साथ-साथ देश के कई अन्य शहरों से यहां के लिए अपनी नियमित उड़ान सेवाएं प्रदान करती हैं। हवाई अड्डे से स्थानीय परिवहन द्वारा आप कर्नूल तक आसानी से पहुंच सकते हैं। 

रेल मार्ग. यहां का निकटतम रेलवे स्टेशन, कर्नूल रेलवे स्टेशन है जो देश के बाकी प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा है। यह रेलवे स्टेशन स्टेशन सिकंदराबाद-बेंग्लुरु रेलवे लाइन पर स्थित है और दिल्ली से यहां के लिए सीधी ट्रेन है तथा अशोकपुरम संपर्कक्रांति यहां पहुंचने के लिए एक बेहतर ट्रेन मानी जाती है। हालांकि मुंबई से कर्नूल के लिए कोई सीधी ट्रेन नहीं है। वैसे आप पहले हैदराबाद पहुँचकर विभिन्न एक्सप्रेस ट्रेनों के माध्यम से कर्नूल तक पहुंच सकते हैं।  

सड़क मार्ग. अपने पड़ोसी राज्यों एवं अन्य क्षेत्रों से कर्नूल सड़क के रास्ते बहुत अच्छी तरह से जुड़ा है, जहां से राज्य परिवहन तथा प्राइवेट बसों द्वारा भी आप आसानी से पहुंच सकते हैं। 

एडोट्रिप के सर्किट प्लानर की मदद से अब यात्रा योजना बनाना हुआ और भी आसान। अब आप इस ख़ास शहर के लिए अपने मुताबिक यात्रा की योजना बनाएं । यहां आपको मिलेगा यात्रा से जुड़े हर एक सुझाव। क्लिक करें।  


  • 1 दिन

  • सांस्कृतिक

  • आंध्र प्रदेश

योजना बनाएं

+ गंतव्य स्थान जोड़ें

स्थान

0.0

रहने की जगह

पर्यटक जगहें

भोजन

परिवहन

ओवरऑल

उत्तर छोड़ दें:

  • रहने की जगह
  • पर्यटक जगहें
  • भोजन
  • परिवहन