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उत्तर प्रदेश में ऐतिहासिक रूप से बेहद समृद्ध कहे जाने वाले मेरठ शहर के पास बसा है हस्तिनापुर, जिसका उल्लेख ना केवल आधुनिक भारत के मानचित्र पर मिलता है बल्कि पौराणिक ग्रंथों में भी इसका वर्णन एक विशिष्ट नगरी के रूप में किया गया है। हज़ारों वर्षों में इस स्थान को कई नामों से पुकारा गया, लेकिन इसे सबसे ज़्यादा महाभारत काल के गवाह के रूप में जाना जाता है। एक ही परिवार में जन्में कौरव और पाडंव के बीच प्राचीन काल में छिड़ी प्रतिद्वंदिता के साक्षी रहे हस्तिनापुर को आज हम आध्यात्म के प्रति जिज्ञासु पर्यटकों के एक लोकप्रिय स्थल के रूप में देख सकते हैं। यह नगरी भगवान श्रीकृष्ण के चमत्कारी नेतृत्व के साथ-साथ कलयुग के आगमन की भी स्थली है। यहां पूरे शहर में फैली ऐतिहासिक एवं पौराणिक धरोहरें, संचरनाएं आदि महाभारतकाल के प्रमाण के रूप में पर्यटकों को अपनी ओर खींचती हैं, जिसका अनुभव करने के लिए देश-विदेश से भारी संख्या में सैलानी यहां आते हैं।  

गौरवशाली रहा है इतिहास

पवित्र मां-गंगा नदी के तट पर बसे हस्तिनापुर का उल्लेख रामायण के साथ-साथ मौर्य साम्राज्य से संबंधित प्राचीन लिपियों में भी मिलता है। हिन्दू प्राचीन धार्मिक ग्रंथ बताते हैं कि यह नगरी प्राचीन काल में कुरु राजवंश की राजधानी हुआ करती थी, जिसके शासक कौरव थे। दरअसल, महाभारत का युद्ध भी हस्तिनापुर के सिंहासन के लिए ही हुआ था, जिसमें पांडवों ने कौरवों पर विजय पायी। कहा जाता है कि कौरवों की पराजय के बाद उत्तराधिकारी के रूप में पांडवों ने करीब 35 वर्षों से अधिक समय तक हस्तिनापुर पर शासन किया। बेशक यह स्थान हिन्दुओं के लिए आस्था का महत्व दर्शाता है, लेकिन जैन समुदाय के लिए भी यह जगह समान रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। यहां स्थित अस्तपद लोटस मंदिर और श्री दिगंबर जैन मंदिर, जैन धर्म अनुयायियों के तीर्थ स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा खुदाई में प्राप्त हुई कुछ संरचनाएं, चट्टानें और शिलालेख इत्यादि महाभारतकाल जितनी प्राचीन हैं। यहां कई प्राचीन मंदिरों की मानो एक श्रृंखला सी देखने को मिलती है। ऐतिहासिक कर्ण मंदिर, पांडेश्वर मंदिर के अलावा हस्तिनापुर कैलाश पर्वत के लिए भी प्रसिद्ध है, साथ ही यहां की समृद्ध जैव विविधता का अनुभव हस्तिनापुर राष्ट्रीय उद्यान में लिया जा सकता है। 

घूमने के स्थल 

अष्टापद तीर्थ. यह वही पवित्र स्थान है, जहां भगवान ऋषभदेव ने मोक्ष प्राप्त किया था। अष्टापद का शाब्दिक अर्थ है आठ चरण। कहा जाता है कि मोक्ष स्थान का मूल स्थान हिमालय में कहीं स्थित है, जो अब चीन के अधिकार क्षेत्र में आता है। यह स्थान मूल अष्टापद तीर्थ की प्रतिकृति है, जिसे तीर्थ मानकर श्रद्धालु यहां प्रार्थना एवं दर्शनों के लिए आते हैं। 

हस्तिनापुर सेंचुरी. करीब 2073 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले इस अभयारण्य एवं राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना सन 1986 में की गयी थी। यहां की समृद्ध जैव विविधता पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र है। इसके अलावा यहां सैलानी 350 से अधिक पक्षियों की विभिन्न प्रजातियां देखी जा सकती है। प्रकृति प्रेमी यहां वन्य जीवों तथा प्राकृतिक सौंदर्य छटा निहारने के लिए बड़े ही जोश और उत्साह से आते हैं। 

दिगंबर जैन मंदिर. मनोरम दृश्यों से समृद्ध एक पहाड़ी पर बने इस मंदिर में भगवान शांतिनाथ की मूर्ति स्थापित है। मंदिर में प्रार्थना के लिए जैन अनुयायियों के साथ-साथ अन्य धर्मों के लोग भी बड़े ही श्रद्धा भाव से यहां आते हैं। आस्थावान जन यहां प्रार्थना करने के साथ-साथ पद्मासन मुद्रा में भगवान की मूर्ति के सामने भी सिर झुकाते हैं। 

कर्ण मंदिर. भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर के संर्दभ में कहा जाता है कि इसका निर्माण महाभारतकाल में हुआ था। हालांकि यह मंदिर बहुत छोटा है और केवल एक कमरे तक ही सीमित दिखाई पड़ता है। बावजूद इसके यहां हर महीने भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। 

पर्व, त्यौहार और आयोजन

दसलक्षण पर्व.जैन धर्म में आस्था रखने वाले इस पर्व का आयोजन हर साल करते हैं। जैन धर्म के पांच सिद्धांतों- सत्य, अहिंसा, अस्तेय, बह्नचर्य और अपरिग्रह का पालन करते हुए दस दिनों तक चलने वाले इस पर्व के दौरान श्रद्धालु उपवास रखते हैं, प्रभु लीन मुद्रा में ध्यान लगाते हैं और ईश्वर की प्रार्थना करते हैं। इस दौरान श्रद्धालु हस्तिनापुर में अलग-अलग जैन मंदिरों में दर्शनों के लिए भी जाते हैं।  

हस्तिानापुर आने का सबसे अच्छा समय 

हस्तिानापुर आप साल में कभी भी जा सकते हैं। क्योंकि यहां का मौसम सालभर लगभग एक जैसा ही रहता है। ज्यादा अनुमान के लिए आप यहां आने से पहले दिल्ली के मौसम का अंदाजा भी ले सकते हैं। लेकिन अगर आप भीषण गर्मी में यहां आने से परहेज करना चाहते हैं तो आपके लिए अक्तूबर से मार्च माह के बीच का समय मुफीद रहेगा। 

हस्तिनापुर कैसे पहुंचे 

सड़क मार्ग. अगर आप अपनी कार या बाइक द्वारा यहां आने का प्रोग्राम बना रहे हैं, तो इससे रोमांचकारी तो कुछ हो ही नहीं सकता। लेकिन इससे पहले आप कुछ जरूरी बातों पर नजर जरूर डाल लें। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंग्लुरु से हस्तिनापुर की दूरी क्रमशः 132 किमी, 1500 किमी, 1500 किमी और 2200 किमी है। अपने निजी वाहन से यहां आने के अलावा आप देश के सभी बड़े शहरों से बस द्वारा भी यहां पहुंच सकते हैं। 

हवाई मार्ग. नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, हस्तिनापुर से सबसे नजदीकी एयरपोर्ट है। यहां से टैक्सी या बस द्वारा 138 किमी की दूरी तय करके आप पहुंच सकते हैं। इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए देशभर के प्रमुख शहरों से सीधी उड़ानें उपलब्ध हैं। 

रेल मार्ग. मेरठ, मुजफ्फरनगर और हापुड यहां के नजदीकी रेलवे स्टेशन हैं, जहां से हस्तिनापुर की दूरी क्रमशः 35 किमी, 45 किमी और 50 किमी है। 

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