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छत्तीसगढ़ राज्य के महत्पवूर्ण तीर्थ स्थलों में शुमार डोंगरगढ़, राजनांदगांव जिले से करीब 35 किमी की दूरी पर स्थित है। ना केवल एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल बल्कि एक पर्यटन स्थल के रूप में भी यह जगह इतनी हलचलभरी और प्रसिद्ध है कि यहां लगभग सालभर ही श्रद्धालुओं का तांता सा लगा रहता है। 

खूबसूरत पहाड़ियों से घिरा यह पूरा इलाका कई मायनों में खुद को एक यादगार भ्रमण स्थली के रूप में साबित करता है। यहां कई छोटे-बड़े तालाब हैं और चारों ओर फैली हरियाली यहां की प्राकृतिक सुंदरता में चार चांद लगाने का काम करती है। ना केवल प्राकृतिक नज़ारों, बल्कि यहां के माहौल में फैली शांति और सर्व धर्म सद्भाव की भावना भी आपको यहां बहुत कुछ खोजने पर मजबूर कर देगी। दरअसल प्रकृति, धर्म और आस्था का यह विविधताभरा संगम ही है जो डोंगरगढ़ को एक शानदार पर्यटन स्थल के रूप में प्रस्तुत करता है।   

इस स्थान के शाब्दिक अर्थ की तह में जाएं तो पता चलता है कि डोंगरगढ़ का अर्थ है पहाड़, जिसमें गढ़ का मतलब किले को दर्शाता है। इसके अलावा यह स्थान मां बम्बलेश्वरी देवी के मंदिर के लिए बहुत प्रसिद्ध है जो कि 1600 मीटर की एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। इस मंदिर के साथ कई किंवदंतियां जुड़ी हैं, जिसकी वजह से इस सुंदर तीर्थ स्थल का आध्यात्मिक महत्व और ज्यादा बढ़ जाता है। नवरात्र के दिनों में यहां भव्य स्तर पर मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें भाग लेने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु देश के अलग-अलग हिस्सों से हर साल यहां देवी मां का आर्शीवाद पाने के लिए आते हैं।   

कहां घूमें

प्रज्ञागिरी. अगर आप छत्तीसगढ़ की यात्रा पर हैं तो इस स्थान पर जरूर जाएं। राज्य का यह पहाड़ी स्थल जाना जाता है भगवान बुद्ध की एक विशाल प्रतिमा के लिए, जहां तक पहुंचना किसी रोमांच से कम नहीं है। पर याद रहे कि बुद्ध की प्रतिमा और पहाड़ों के सुंदर नजारे का आनंद लेने के लिए आपको 225 सीढ़ीयां चढ़नी होंगी जो किसी पहाड़ को चढ़ने जैसा ही है। बताया जाता है कि इस सुंदर स्थल का निर्माण सन 1998 के आस-पास करवाया गया था। 

बंबलेश्वरी मंदिर. भारत में आपको ऐसे अनेकों मंदिर देखने को मिलेंगे जो किसी ऊंचे पहाड़ की चोटी पर बने हैं। करीब 1600 फीट की ऊंचाई पर स्थित बम्बलेश्वरी देवी का यह मंदिर भी एक ऊंची पहाड़ी पर बना है। इसके पास ही एक अन्य मंदिर भी है, जिसे छोटी बम्बलेश्वरी के नाम से जाना जाता है। दोनों मंदिरों के बीच की दूरी महज आधा किमी ही है। नवरात्र के दिनों में यहां भव्य मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें भाग लेने के लिए दूर-दूर से भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।  

क्या करें

जैन मंदिर का भ्रमण. राज्य में बेहद खूबसूरत नजारों के लिए प्रसिद्ध चंद्रागिरी पहाड़ियों की गोद में बसा यह जैन मंदिर असल में प्रसिद्ध तीर्थंकर चंद्रप्रभुजी की विशाल प्रतिमा के लिए। यहां इस मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालु उनका दिव्य आर्शीवाद प्राप्त करने के लिए श्रद्धाभाव के साथ आते हैं। 

अंबा वाटर पार्क में करें मस्ती. अगर आप सही मायने में अपने परिवार या दोस्तों के संग मस्ती के कुछ सुनहरे पल बिताना चाहते हैं तो निश्चित रूप यह स्थल आपके लिए ही है। स्विमिंग पूल में तैराकी का आनंद लेने के साथ-साथ कई तरह की वाटर स्लाइड्स और विभिन्न प्रकार की जल क्रीड़ाओं का भी यहां लुत्फ उठाया जा सकता है। यही नहीं यहां वाटर पार्क में स्थित कई शानदार रेस्तरां भी है, जहां आप अलग-अलग प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजनों का भी स्वाद चख सकते हैं।   

पर्व, त्यौहार और सांस्कृतिक गतिविधियां

नलवाड़ी मेला. मवेशियों की खरीद-फरोख्त के लिए प्रसिद्ध इस मेले का आयोजन 4-5 दिनों के लिए किया जाता है, जो कई मायनों में एक रोमांचकारी अनुभव प्रदान करता है। क्योंकि इस दौरान कुश्ती सहित कई मनोरंजक आयोजन भी देखे जा सकते हैं। मेले में यहां के आस-पास के क्षेत्रों जैसे नालागढ़ आदि से मवेशी लाकर बेचे और खरीदे जाते हैं। मोलभाव से लेकर जानवरों की बोली लगाना और पशुओं के बड़े-बड़े झुंडों के साथ आये व्यापारियों के साथ यहां मेले का पूरा नजारा ही बड़ा अद्भुत सा लगता है। 

यहां मेले में लोगों की भीड़ इस कदर उमड़ती है कि पूछो मत, साथ में कुश्ती के दौरान लोग जब अपने-अपने पसंदीदा पहलवानों को जोर आजमाइश करते देखते हैं, पूरा माहौल जोश से भर जाता है। इस दौरान कई स्थानीय धावक और जिम्नास्टिक का प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी भी मेले में भाग लेते दिखते हैं, जिससे इस मेले पर एक तरह का सांस्कृतिक उत्सव का रंग चढ़ जाता है।

हरेली पर्व. इस त्यौंहार का जिक्र आते ही मन हरा भरा सा हो जाता है। जाहिर तौर पर इस पर्व का ही कुछ ऐसा है। छत्तीसगढ़ के कुछ सबसे बड़े और बेहद चर्चित उत्सवों में एक हरेली त्यौंहार का नाम हिन्दी के शब्द हरियाली से लिया गया है, जिसका अर्थ है खुशी, संपन्नता और चारों ओर प्राकृतिक रूप से हरा भरा माहौल। देवता कुटकी दाई को समर्पित यह त्यौंहार श्रावण अमावस्या या अमावस्या के दिन मनाया जाता है। 

डोंगरगढ़ आने का सबसे अच्छा समय 

जुलाई से सितंबर माह के बीच आप यहां कभी भी आ सकते हैं। इन दिनों यहां मौसम सुहावना बना रहता है। 

कैसे पहुंचे

हवाई मार्ग. रायपुर हवाई अड्डा, यहां का सबसे निकटतम हवाई अड्डा है जो इस स्थान से करीब 101 किमी की दूरी पर स्थित है। हवाई अड्डे पर उतरने के बाद आप स्थानीय टैक्सी, बस या किसी अन्य साधन द्वारा अपने गंतव्य तक आसानी से पहुंच सकते हैं। 

सड़क मार्ग. डोंगरगढ़ तक सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है। क्योंकि यह देश के अन्य हिस्सों से अच्छी तरह से जुड़ा है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंग्लुरु और पुणे से यह शहर सकड़ के रास्ते अच्छी तरह से जुड़ा है। 

रेल मार्ग. यहां का निकटतम रेलवे स्टेशन, रायपुर रेलवे स्टेशन है। दिल्ली, मुंबई, पुणे और बेंग्लुरु जैसे शहरों से ट्रेनों द्वारा आप यहां आसानी से पहुंच सकते हैं। गीतांजलि एक्सप्रेस, आज़ाद हिंद एक्सप्रेस और महाराष्ट्र एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें यहां पहुंचने के लिए एक अच्छा विकल्प हैं। स्टेशन से सार्वजनिक परिवहन के साथ-साथ आप टैक्सी या बस द्वारा भी आसानी से डोंगरगढ़ पहुंच सकते हैं। 

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